सुप्रीम कोर्ट में बढ़ गई जजों की संख्या, कैबिनेट का फैसला मंजूर; राष्ट्रपति ने जारी किया अध्यादेश

Supreme Court Judge Number Increased: सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है. इस संदर्भ में एक अध्यादेश जारी किया गया है. अब देश की सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 38 जज नियुक्त हो सकेंगे.

Supreme Court Judge Number Increased: भारतीय सुप्रीम कोर्ट में अब न्यायाधीशों की संख्या बढ़ गई है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले को मंजूरी दे दी है. केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवााल ने रविवार को इसकी जानकारी दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई को संसद में ‘द सुप्रीम कोर्ट (नंबर ऑफ जजेज) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इसका उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या मौजूदा 33 से बढ़ाकर 37 करना है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल नहीं होंगे.

कानून मंत्री मेघवाल ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘राष्ट्रपति ने ‘द सुप्रीम कोर्ट (नंबर ऑफ जजेज) अमेंडमेंट ऑर्डिनेंस, 2026’ जारी करके सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने की मंजूरी दे दी है. इसके जरिए ‘सुप्रीम कोर्ट (नंबर ऑफ जजेज) एक्ट, 1956’ में संशोधन किया गया है.’ कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इस फैसले का व्यापक स्वागत किया है और इसे सुप्रीम कोर्ट में बढ़ते लंबित मामलों और मुकदमों के बोझ से निपटने की दिशा में एक समयानुकूल कदम बताया है.

लंबित मामलों के निपटारे के लिए बढ़ाई गई संख्या

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या तय कर सके. सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का मकसद अदालत की कार्यक्षमता को मजबूत करना और लोगों को जल्दी न्याय दिलाना है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में 93 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं, जिनके तेजी से निपटारे के लिए यह कदम उठाया गया है. इसी फैसले को लागू करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई को संसद में ‘सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.

सुप्रीम कोर्ट में अब कुल जजों की संख्या 33 से बढ़कर 37 हो गई है. हालांकि कुल संख्या 38 होगी, क्योंकि इसमें मुख्य न्यायाधीश को शामिल नहीं किया जाता. सुप्रीम कोर्ट में अब भी तय 33 जजों में से 2 पद खाली हैं. हालांकि, आने वाले समय में जल्द इन पर नियुक्ति की जा सकती है.

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संसद से लेनी पड़ेगी मंजूरी

राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश को अभी संसद से भी मंजूरी लेनी पड़ेगी. क्योंकि संसद न चलने के दौरान सरकार प्रेसिडेंट के मार्फत अध्यादेश जारी कर सकती है, जो 6 महीने तक विधायी रहता है. इसके बाद अगर संसद ने मंजूरी दी तो वह कानून बन जाता है, वरना अध्यादेश स्वतः निरस्त माना जाता है.

राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश. फोटो- स्क्रीनशॉट.

समय-समय पर बढ़ाई जाती रही है संख्या

मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए समय-समय पर जजों की संख्या में बदलाव किए जाते रहे हैं. 1950 में भारत की सर्वोच्च न्यायालय में कुल 8 जज ( 7 न्यायाधीश और 1 प्रधान न्यायाधीश) थे. सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत मुख्य न्यायाधीश के अलावा केवल 10 जजों का प्रावधान था. बाद में जरूरत के अनुसार इस संख्या को कई बार बढ़ाया गया. वर्ष 1960 में इसे 13 किया गया, 1977 में 17, 1986 में 25 और 2008 में 30 जज कर दिए गए. इसके बाद 2019 में आखिरी बार संशोधन हुआ, जब मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर अन्य जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 कर दी गई थी.

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