सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार ( 2 सितंबर ) को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को लेकर अहम टिप्पणी की. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, शीर्ष अदालत ने कहा कि बीसीआई को कोई भी नीतिगत फैसला भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल के परामर्श से लेना होगा. अदालत ने स्पष्ट किया कि बीसीआई के नीतिगत निर्णयों में दोनों कानून अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए.
नीतिगत फैसलों में सक्रिय भागीदारी जरूरी
सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. इसी दौरान अदालत ने बीसीआई के कामकाज और नीतिगत निर्णयों को लेकर यह टिप्पणी की.
SC ने साफ कहा- सलाह के साथ हों फैसले
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीसीआई द्वारा लिए जाने वाले प्रत्येक नीतिगत निर्णय में भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए. अदालत की इस टिप्पणी को बीसीआई के नीतिगत कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को चुनौती
शीर्ष अदालत में अधिवक्ता योगमाया एमजी की ओर से दायर याचिका में बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के लंबे समय से पद पर बने रहने को चुनौती दी गई है. याचिका में उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने का अनुरोध भी किया गया है.
2012 में पहली बार बने थे अध्यक्ष
याचिका के मुताबिक, मनन कुमार मिश्रा पहली बार साल 2012 तक के लिए बीसीआई के अध्यक्ष चुने गए थे. हालांकि, उन्होंने साल 2014 में कुछ समय के लिए अध्यक्ष पद छोड़ दिया था. इसके बाद उसी वर्ष नवंबर में वह दोबारा अध्यक्ष पद पर काबिज हो गए.
नवंबर 2014 से लगातार पद पर
याचिका में कहा गया है कि नवंबर 2014 में दोबारा अध्यक्ष बनने के बाद से मनन कुमार मिश्रा लगातार इस पद पर बने हुए हैं. इसी लंबे कार्यकाल को लेकर उनकी अध्यक्षता की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है.
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