Sugar Price: खरगे का दावा- तीन महीने में 40% महंगी हुई चीनी, सरकार ने दिया जवाब

Sugar Price: त्योहारों से पहले चीनी के बढ़ते दामों पर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कीमतों में करीब 40 फीसदी उछाल का दावा करते हुए सरकार से तीन सवाल पूछे हैं.

Sugar Price: त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने सवाल उठाया कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल भारत में स्टॉक नौ साल के निचले स्तर पर कैसे पहुंच गया और कीमतें इतनी तेजी से क्यों बढ़ीं. दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने साफ किया है कि चीनी महंगी होने की वजह एथेनॉल के लिए गन्ने का इस्तेमाल नहीं, बल्कि कम उत्पादन, मौसम की मार और बढ़ी मांग है.

पहले चीनी उत्पादन में गिरावट आई, फिर भंडार 9 सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, अब हम विदेशों से चीनी आयात कर रहे हैं और दूसरी ओर, हम गन्ने को इथेनॉल में मिलाकर पेट्रोल में मिला रहे हैं!- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे

खरगे ने सरकार से पूछे तीन सवाल

  1. दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देश भारत में आज चीनी का भंडार पिछले 9 सालों में सबसे निचले स्तर पर क्यों है? हम निर्यात रोकने और 10 लाख टन चीनी बिना शुल्क के आयात करने की स्थिति तक कैसे पहुंच गए?
  2. चीनी तीन महीनों में लगभग 40% महंगी हो गई है- त्योहारों से ठीक पहले जनता पर पड़ रहे इस मूल्य वृद्धि के लिए कौन जिम्मेदार है?
  3. जब देश में चीनी की कमी है और सरकार विदेशों से चीनी आयात कर रही है, तो गन्ने और अनाज को 20 यूरो में इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है? यह किस तरह का आत्मनिर्भर भारत है?

तीन महीने में करीब 40% महंगी हुई चीनी

खरगे ने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत करीब 40 प्रतिशत बढ़ी है. उन्होंने सवाल किया कि त्योहारों से पहले आम लोगों पर बढ़े इस खर्च की जिम्मेदारी किसकी है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने एथेनॉल नीति को भी निशाने पर लिया. उनका कहना है कि जब देश में चीनी की कमी है तो गन्ने और अनाज को E20 के लिए एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल करने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही.

सरकार बोली- एथेनॉल वजह नहीं

केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हाल में चीनी के दाम बढ़ने का कारण एथेनॉल उत्पादन नहीं है. उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के मुताबिक 20 जुलाई को खुदरा चीनी की कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई.

सरकार का कहना है कि एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी का हिस्सा घटा है. यह 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत था, जो 2025-26 में लगभग 9 प्रतिशत रह गया है. साथ ही देश के करीब तीन-चौथाई एथेनॉल का उत्पादन अब अनाज, खासकर मक्का से हो रहा है.

सरकार ने कहा- उत्पादन अनुमान घटने से बढ़ा दबाव

सरकार के मुताबिक चालू सीजन में पहले 343 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन का अनुमान था, लेकिन अब इसे घटाकर 306 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है. गन्ने की फसल को रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों से नुकसान हुआ है. कई इलाकों में ज्यादा बारिश और जलभराव का भी उत्पादन पर असर पड़ा है. इसके साथ त्योहारों से पहले मांग बढ़ने, वैश्विक बाजार में कम सप्लाई, जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसे कारणों से भी कीमतों पर दबाव बढ़ा है.

वैश्विक बाजार में भी चीनी हुई महंगी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चीनी की सप्लाई को लेकर दबाव बना हुआ है. 2026-27 में वैश्विक चीनी घाटा करीब 33 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी का भाव 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन था, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन पहुंच गया. यानी दो महीने से भी कम समय में कीमतों में 16 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई है.

जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने लगाया स्टॉक लिमिट

सरकार ने घरेलू बाजार में कृत्रिम कमी और जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू की है. डीलरों के लिए 30 नवंबर तक 400 टन की सीमा लागू है. इसके अलावा 1 सितंबर से बड़े खरीदारों के लिए 15 दिन तक का स्टॉक रखने की सीमा लागू होगी. केंद्र और राज्य की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में स्टॉक की जांच भी कर रही हैं.

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लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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