कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की किताब "बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव" रिलीज से पहले ही चर्चा में है. वजह है भारत में इस किताब के प्रकाशन को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की भूमिका. एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि पेंगुइन ने किताब के कुछ हिस्सों में बदलाव और कुछ अंश हटाने को कहा था, जिसे सोनिया गांधी ने स्वीकार नहीं किया. हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अब इस दावे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह भारत में इस किताब की प्रकाशक नहीं है. क्या है ये पूरा मामला, आसान भाषा में समझते हैं.
कब आएगी सोनिया गांधी की किताब बिलॉन्गिंग
- सोनिया गांधी की बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव की अंतरराष्ट्रीय रिलीज 10 नवंबर 2026 को होने वाली है. अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ ने अगस्त में इसकी घोषणा की थी.
- नॉफ, पेंगुइन रैंडम हाउस समूह का ही एक प्रकाशन संस्थान है. घोषणा के समय किताब के पहले प्रिंट रन के लिए एक लाख प्रतियों का आंकड़ा भी सामने आया था.
- किताब में सोनिया गांधी अपनी जिंदगी के निजी और राजनीतिक पहलुओं को सामने रखने वाली हैं.
- इसमें इटली में बचपन, राजीव गांधी से मुलाकात और शादी, नेहरू-गांधी परिवार में उनका जीवन, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या के बाद का दौर और फिर राजनीति में उनकी एंट्री जैसे प्रसंग शामिल बताए गए हैं.
कहां से शुरू हुआ विवाद ?
- 28 अगस्त को एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया भारत में इस किताब को प्रकाशित करने वाला था.
- रिपोर्ट के मुताबिक, प्रकाशक ने पांडुलिपि के एक हिस्से में कुछ एडिटोरियल चेंजेस एंड डिलीशंस यानी संपादकीय बदलाव और कुछ अंश हटाने का सुझाव दिया था.
- सोनिया गांधी ने इन बदलावों को स्वीकार नहीं किया और इसके बाद भारत में प्रकाशन को लेकर स्थिति बदल गई.
- रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पेंगुइन के भारतीय प्रकाशन अधिकारों की दौड़ से बाहर होने के बाद दूसरे प्रकाशक किताब के भारतीय संस्करण को लेकर बातचीत में हैं.
- इनमें हार्पर कॉलिन्स का नाम सबसे आगे बताया गया है. हालांकि, अभी तक भारत के लिए नए प्रकाशक की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
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पेंगुइन ने इस मामले में क्या कहा?
- इस मामले को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने 28 अगस्त को बयान जारी कर कहा कि वह भारत में बिलॉन्गिंग की प्रकाशक नहीं है.
- कंपनी ने यह भी कहा कि यह कहना परिस्थितियों को सही तरीके से पेश नहीं करता कि सोनिया गांधी द्वारा संपादकीय बदलाव स्वीकार नहीं किए जाने के कारण उसने किताब प्रकाशित करने का फैसला बदल दिया.
- पेंगुइन ने माना कि वह किताब प्रकाशित करने को इच्छुक थी. कंपनी के मुताबिक, किसी किताब के प्रकाशन से पहले तथ्य-जांच करना और लेखक को जरूरी सुझाव देना प्रकाशक की सामान्य जिम्मेदारी है.
- हालांकि, सोनिया गांधी के साथ हुई बातचीत में किन हिस्सों को लेकर चर्चा हुई, इस बारे में पेंगुइन ने कोई जानकारी देने से इनकार किया है. कंपनी ने इसे गोपनीय बातचीत बताया है.
भारत में अब कौन और कहां छपेगी किताब?
- फिलहाल इसका स्पष्ट आधिकारिक जवाब नहीं है. रिपोर्टों के मुताबिक, कई भारतीय प्रकाशक इस किताब के अधिकार हासिल करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं और हार्पर कॉलिन्स के समझौते के करीब पहुंचने की बात कही गई है.
- सोनिया गांधी की यह किताब इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को हमेशा काफी हद तक सार्वजनिक चर्चा से अलग रखा है.
- प्रकाशक की घोषणा के अनुसार, यह संस्मरण उनके निजी अनुभवों के साथ-साथ भारत में छह दशकों के सामाजिक और राजनीतिक बदलाव को उनके नजरिए से देखने की कोशिश करेगा.
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