…जब स्मृति ईरानी से ऋषि कपूर ने कहा था-भाग जल्दी पागल

Smriti Irani reaction on Rishi Kapoor death : केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया कि 2014 में मोदी सरकार के गठन के बाद उन्हें शपथ लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी बुलाने की बात अभिनेता ऋषि कपूर को मालूम हुई तो उन्होंने ईरानी से कहा, ” भाग जल्दी दिल्ली पागल”. कपूर को श्रद्धांजलि देते हुए ईरानी ने बताया कि उनकी अभिनेता से आखिरी मुलाकात एक फिल्म के सेट पर हुई थी.

नयी दिल्ली : केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया कि 2014 में मोदी सरकार के गठन के बाद उन्हें शपथ लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी बुलाने की बात अभिनेता ऋषि कपूर को मालूम हुई तो उन्होंने ईरानी से कहा, ” भाग जल्दी दिल्ली पागल”. कपूर को श्रद्धांजलि देते हुए ईरानी ने बताया कि उनकी अभिनेता से आखिरी मुलाकात एक फिल्म के सेट पर हुई थी.

उन्होंने ट्वीट किया, “2014 में उन्हें (कपूर को) मालूम हुआ कि मुझे शपथ लेने के लिए बुलाया गया है तो उन्होंने मुझसे कहा ‘ भाग जल्दी दिल्ली पागल.’ आखिरी बार मैंने उन्हें एक सेट पर देखा था और उस तरह से मैं उन्हें याद करूंगी. आपको अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने के लिए प्रोत्साहित करना, छोटी छोटी चीज़ों का ध्यान रखना, आपको कौशल सिखाना और इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता था कि आप कब से काम रहे हैं.”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ” उन्होंने (कपूर ने) कहा कि खन्ना, कपूर और मल्होत्रा हमेशा अच्छी जिंदगी जीना पसंद करते हैं, हमेशा हंसी मजाक करते हैं… ऋषि सर स्वर्ग को खुश बनाइए. आपकी कमी खलेगी. ” मंत्री का शादी से पहले उपनाम नाम मल्होत्रा था. 67 साल के कपूर का मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया है. वह कैंसर से पीड़ित थे.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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