Smith Gonsalves: सच्ची शिक्षा वह है जो मन को अपने विचारों की दुनिया बनाने में सक्षम बनाए.” रवींद्रनाथ टैगोर के इस विचार को स्मिथ गोंसाल्विस अपने व्यक्तिगत और पेशेवर दृष्टिकोण के बेहद करीब मानते हैं. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने चितकारा विश्वविद्यालय में आयोजित साइबरप्रो अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए भारत में शिक्षा, प्रतिभा और तकनीकी नवाचार की दिशा पर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए. स्मिथ गोंसाल्विस का मुख्य संबोधन “साइबर सुरक्षा का भविष्य और एजीआई की ओर बढ़ती दुनिया” विषय पर केंद्रित था. हालांकि विषय भविष्य की तकनीक से जुड़ा था, लेकिन उनके संबोधन का केंद्र वर्तमान भारत की उन चुनौतियों पर रहा, जो देश की अगली पीढ़ी की तकनीकी क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं.
उन्होंने भारत में प्रतिभा के पलायन को एक नई चुनौती बताते हुए कहा कि आज समस्या केवल प्रतिभा की कमी नहीं है. भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उद्योग, शिक्षा जगत और निवेशकों के बीच पर्याप्त समन्वय का अभाव एक बड़ी समस्या बन रहा है. विद्यार्थियों को लगातार अलग तरीके से सोचने के लिए कहा जाता है, लेकिन उन्हें यह समझने का अवसर कम मिलता है कि जिस व्यवस्था से बाहर निकलने की बात की जा रही है, उसकी वास्तविक संरचना क्या है.
स्मिथ ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी अनुप्रयोगों की सुरक्षा जांच जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जबकि मूल तकनीक, संचालन प्रणालियों, फर्मवेयर और गहन तकनीकी प्रणालियों के निर्माण की दिशा में जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या अपेक्षाकृत बहुत कम है. उनके अनुसार, भारत को केवल तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं, बल्कि मूल तकनीक बनाने वाला देश बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा.
उन्होंने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में अंकों, श्रेणी और ऊंचे वेतन वाली नौकरियों को सफलता का प्रमुख मापदंड मानने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाया. उनके अनुसार, विद्यार्थियों और अभिभावकों पर लगातार बेहतर अंक और प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश का दबाव रहता है, जबकि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य जिज्ञासा, रचनात्मकता, सहयोग और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना होना चाहिए.
स्मिथ ने इज़राइल के नवाचार मॉडल से भी सीख लेने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि वहां उद्यमिता और तकनीकी सफलता को केवल व्यक्तिगत आर्थिक उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि राष्ट्रीय क्षमता निर्माण से भी जोड़ा जाता है. भारत में भी वैज्ञानिक सोच, गहन तकनीकी अनुसंधान और उद्यमिता को राष्ट्रीय विकास की व्यापक रणनीति से जोड़ने की आवश्यकता है.उनका मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग केवल परीक्षाओं में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की रचनात्मकता, स्मरण शक्ति, एकाग्रता और स्वतंत्र सोच को मजबूत करने के लिए होना चाहिए.
चितकारा विश्वविद्यालय में मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन के दौरान स्मिथ ने अपने मार्गदर्शकों और वरिष्ठ विशेषज्ञों के साथ मंच साझा करने को विशेष सम्मान बताया. उन्होंने डॉ. प्रवीण कुमार खोसला, मेजर जनरल नीरज बाली, दिलदीप सिंह और सौरभ चमोत्रा के प्रति आभार व्यक्त किया. स्मिथ गोंसाल्विस का संदेश स्पष्ट था—भारत को केवल अधिक अंक पाने वाले विद्यार्थियों की आवश्यकता नहीं है. देश को ऐसे विचारकों, वैज्ञानिकों और निर्माताओं की आवश्यकता है जो नई तकनीक विकसित करें, कठिन समस्याओं को समझें और भारत की अगली तकनीकी छलांग की नींव तैयार करें.
