पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा के बेटे की मौत का राज खोलेगी SIT, पिता और पत्नी के बीच अफेयर या फिर …

EX DGP Mohammad Mustafa : पूर्व डीजीपी का बेटा अपने आवास पर बेहोश मिलता है, अस्पताल ले जाने पर डाॅक्टर उसे मरा हुआ बताते हैं. पुलिस जांच में यह पता चलता है कि ब्यूप्रेनॉर्फिन दवा के ओवरडोज से उसकी मौत हुई है. यह दवा अत्यधिक दर्द और हेरोइन की लत छुड़ाने के काम आती है. कुछ ही दिन में परिवार का एक परिचित सामने आता है और यह दावा करता है कि पूर्व डीजीपी के बेटे अकील अख्तर की मौत स्वाभाविक नहीं है, बल्कि उसकी हत्या हुई है और साजिश करने वाले उसके पिता और माता हैं. अब जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज हुई है और एसआईटी भी गठित कर दी गई है.

EX DGP Mohammad Mustafa : पंजाब के पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा के बेटे अकील अख्तर की मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है. पुलिस ने शिकायत के आधार पर पूर्व डीजीपी उनकी पत्नी रजिया सुल्तान को पूर्व मंत्री भी हैं और मृतक की पत्नी के खिलाफ हत्या और साजिश रचने की प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर की है, वहीं डीजीपी ने नया खुलासा करते हुए कहा कि मेरा बेटा नशे का आदी था और वह हमेशा अपनी मां को प्रताड़ित करता था. उन्होंने कहा कि जिन लोगों को यह महसूस हो रहा है कि मैं बेटे की मौत से इतना दुखी हूं उनकी साजिशों का जवाब नहीं दे पाऊंगा, वो गलती पर हैं. मोहम्मद मुस्तफा का कहना है कि उनका बेटा नशे का आदी था. हमने उसका नशा छुड़ाने के लिए उसका कई जगह इलाज करवाया, लेकिन कुछ ही दिन में वह फिर अपनी लत के साथ खड़ा हो जाता था. वह अपनी मां को प्रताड़ित करता था. अपनी पत्नी को परेशान करता था, मैंने अपनी बहू को उसके पति के अत्याचार से बचाया है.

कौन है अकील अख्तर और उसकी मौत कैसे हुई?

अकील अख्तर पंजाब के पूर्व डीपीजी अकील अख्तर का बेटा है. वह 16 अक्टूबर को पंचकूला, हरियाणा स्थित आवास में बेहोश पाया गया था, उसे अस्पताल ले जाने पर डाॅक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया. अकील अख्तर के सोशल मीडिया पोस्ट को देखकर यह महसूस होता है कि वो किसी तरह की मानसिक परेशानी का शिकार था. उसने अगस्त में एक सोशल मीडिया पोस्ट किया था, जिसके आधार पर पूर्वी डीजीपी और उनके परिवार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें उसने यह बताया था कि उसके पिता मोहम्मद मुस्तफा का उसकी पत्नी के साथ संबंध है. वह वीडियो में यह बताता है कि उसकी पत्नी और पिता के अफेयर को उसने पकड़ लिया था, जिसकी वजह से उसकी जान पर खतरा था. अकील यह आरोप भी लगाया था कि उसकी मां रजिया और उसकी बहन भी साजिश का हिस्सा हैं, जिसकी वजह से उसे अपनी जान का खतरा है. अकील का यह वीडियो उसकी मौत के कुछ सप्ताह पहले का है.

कौन हैं पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा, जिन पर लग रहा है बेटे की हत्या का आरोप?

पंजाब के पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा 1985 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा पंजाब के सरकारी स्कूलों में हुई उसके बाद वे अमृतसर के खालसा कॉलेज से ग्रेजुएट हुए.उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की. उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलएम की डिग्री भी प्राप्त की है. उनपर अपने ही बेटे अकील अख्तर की हत्या का आरोप लगा है. इतना ही नहीं, उनपर उनके अपने ही बेटे ने यह आरोप लगाया है कि उनका अपनी बहू के साथ अफेयर था, जिसकी जानकारी उनके बेटे हो गई थी. परिवार के परिचित शमशुद्दीन चौधरी ने अकील अख्तर के कुछ पुराने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुस्तफा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पूर्व डीजीपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.

नेचुरल डेथ का केस कैसे बन गया हत्या का मामला?

16 अक्टूबर को जब अकील अख्तर को उसके पंचकूला स्थित आवास में बेहोश पाया गया और शुरुआती जांच में यह कहा गया कि ब्यूप्रेनॉर्फिन दवा के ओवरडोज से उसकी मौत हुई है. इस वजह से पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव उनके परिजनों को सौंप दिया, लेकिन 20 अक्टूबर को उनके परिवार के परिचित व्यक्ति शमशुद्दीन चौधरी ने प्रेस काॅन्फ्रेंस कर अकील के कई वीडियो दिखाए, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि अकील अख्तर की मौत नहीं हुई बल्कि उसके परिवार वालों ने ही उसकी हत्या की है. लिखित शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज कर ली और एसआईटी का गठन भी कर दिया है, जो इस मामले की जांच करेगी. पूर्व डीजीपी और उनके परिवार पर हत्या और साजिश रचने का आरोप लगा है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

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रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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