संदीप सावर्ण, नयी दिल्ली
36 दिनों तक छात्र आंदोलन, नारों और जनसैलाब का केंद्र रहा जंतर-मंतर रविवार की सुबह बिल्कुल बदला-बदला नजर आया. जहां कुछ घंटे पहले तक हजारों युवाओं की मौजूदगी, पोस्टर, तिरंगे और गीतों की गूंज थी, वहीं रविवार की अलसाई सुबह सन्नाटा पसरा हुआ था. अधिकांश छात्र अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो चुके थे. जिन्हें ट्रेन या बस में तत्काल टिकट नहीं मिल सका, उन्होंने रात रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर गुजारी.
एनडीएमसी की टीम ने की साफ-सफाई
सुबह होते ही नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) की टीम ने जंतर-मंतर परिसर में व्यापक सफाई अभियान शुरू कर दिया. सुरक्षा कारणों से पूरे क्षेत्र को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया था. संसद मार्ग की ओर बैरिकेडिंग कर आवाजाही रोक दी गयी. किसी को भी जंतर-मंतर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गयी.
पुलिस ने रविवार को युवाओं को अंदर जाने से रोका
हालांकि, दिनभर सैकड़ों छात्र-छात्राएं जंतर-मंतर पहुंचते रहे. कई युवा आंदोलन स्थल को अंतिम बार देखने या अपने साथियों से मिलने के लिए अंदर जाना चाहते थे, लेकिन तैनात पुलिसकर्मियों ने सभी को बैरिकेड पर ही रोक दिया. किसी भी तरह का जमावड़ा लगाने की अनुमति नहीं दी गयी.
अपने सामान्य स्वरूप में लौटा जंतर-मंतर
एनडीएमसी के अधिकारियों के अनुसार, पूरे परिसर की सफाई के लिए करीब 200 सफाईकर्मियों को लगाया गया था. उन्होंने धरना स्थल, सड़क, फुटपाथ और आसपास के पूरे इलाके की सफाई की. शाम करीब पांच बजे तक जंतर-मंतर पूरी तरह साफ-सुथरा नजर आने लगा. 36 दिनों तक आंदोलन का प्रतीक बना यह स्थल एक बार फिर अपने सामान्य स्वरूप में लौट आया. लेकिन यहां बीते दिनों की गूंज अब भी लोगों की यादों में ताजा है.
प्रभात खबर टीम की ग्राउंड रिपोर्ट
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