Shinde vs Uddhav: उद्धव गुट के पास आगे क्या है रास्ता? स्पीकर के फैसले को संजय राउत ने बताया मैच फिक्सिंग

सदस्यता मामले पर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने साजिश बताया. उन्होंने कहा, स्पीकर नार्वेकर के पास इतिहास लिखने का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने बड़ा मौका गंवा दिया. हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. जो जश्न मना रहे वो सभी गद्दार हैं. यह मैच फिक्सिंग है.

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बुधवार को उद्धव ठाकरे गुट को तगड़ा झटका देते हुए एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना माना. शिंदे गुट के 16 विधायकों की अयोग्यता मामले पर फैसला सुनाते हुए नार्वेकर ने कहा, 21 जून, 2022 को जब प्रतिद्वंद्वी समूहों का उदय हुआ तो शिवसेना का एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला धड़ा ही असली शिवसेना था. स्पीकर के फैसले के बाद जहां शिंदे गुट के कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं, वहीं उद्धव ठाकरे में निराशा दिख रही है. अब सवाल उठता है कि विधानसभा अध्यक्ष से झटका लगने के बाद उद्धव गुट के पास आगे क्या रास्ता है.

स्पीकर के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे उद्धव ठाकरे

सदस्यता मामले पर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने साजिश बताया. उन्होंने कहा, स्पीकर नार्वेकर के पास इतिहास लिखने का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने बड़ा मौका गंवा दिया. हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. जो जश्न मना रहे वो सभी गद्दार हैं. यह मैच फिक्सिंग है. संजय राउत ने कहा, आज का फैसला साजिश है. शिवसेना कभी खत्म नहीं होगी. शिवसेना(UBT) सांसद संजय राउत ने कहा, आज का फैसला कोई न्याय नहीं है ये एक षड्यंत्र है, हम सुप्रीम कोर्ट जरूर जाएंगे. हमारी लड़ाई न्यायालय में जारी रहेगी.

वही होता है जो मंजूर-ए-नरेंद्र मोदी और अमित शाह होता है

शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुवेर्दी ने कहा, मैं बिल्कुल भी आश्चर्यचकित नहीं हूं. हमने सुना था ‘वही होता है जो मंजूर-ए-खुदा’ होता है’…2014 के बाद एक नई परंपरा शुरू हुई है ‘वही होता है जो मंजूर-ए-नरेंद्र मोदी और अमित शाह होता है’. यही हम महाराष्ट्र में होते हुए देख रहे हैं. जिस चीज को सुप्रीम कोर्ट ने ‘अवैध’ और ‘असंवैधानिक’ कहा था, उसे वैध करने का काम हो रहा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है.

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उद्धव ठाकरे के पास पार्टी बचाने की चुनौती

स्पीकर से झटका मिलने के बाद उद्धव ठाकरे के पास आगे पार्टी को बचाने की नयी चुनौती होगी. चुनाव आयोग एकनाथ शिंदे गुट को पहले की असली शिवसेना मानते हुए चुनाव चिह्न तीर कमान सौंप चुका है. स्पीकर के फैसले के बाद ऐसी आशंका जताई जा रही है कि उद्धव गुट के कुछ विधायक शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं. यही नहीं आगामी चुनाव में उद्धव ठाकरे के सामने खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती होगी.

उद्धव ठाकरे के पास एकनाथ शिंद और उनके नेताओं को हटाने का अधिकार नहीं

शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी धड़े द्वारा एक-दूसरे के विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर अपना फैसला पढ़ते हुए नार्वेकर ने कहा, उद्धव ठाकरे के पास एकनाथ शिंदे और उनके विधायकों को हटाने का अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को सौंपा गया 1999 का पार्टी संविधान मुद्दों पर फैसला करने के लिए वैध संविधान था. उन्होंने कहा कि इस संविधान के अनुसार ‘राष्ट्रीय कार्यकारिणी’ सर्वोच्च निकाय है.

शिवसेना के 2018 संशोधित संविधान को वैध नहीं माना जा सकता: स्पीकर

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा, शिवसेना के 2018 संशोधित संविधान को वैध नहीं माना जा सकता क्योंकि यह भारत के चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है. रिकॉर्ड के अनुसार, मैंने वैध संविधान के रूप में शिव सेना के 1999 के संविधान को ध्यान में रखा है.

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By Arbindkumar mishra

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