शशि थरूर ने कहा-मेरे काफिले पर हुआ हमला, एक अनचाही घटना; लेकिन हम अपना अभियान पूरा करेंगे

Shashi Tharoor : केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता शशि थरूर के काफिले पर हुआ हमला काफी चर्चा में है. हालांकि शशि थरूर ने कहा कि उनपर ऐसे हमलों का कोई असर नहीं है और वे अपने चुनावी अभियान को पूरा करेंगे.

Shashi Tharoor : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के काफिले पर शुक्रवार रात जो हमला हुआ, उसे एक अनचाही घटना बताते हुए शशि थरूर ने कहा कि यह नहीं होना चाहिए था. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं 15-16 दिनों से ट्रैवल कर रहा हूं, लेकिन यह एक घटना हुई है. हमने इसे पीछे छोड़ दिया है और हम आगे बढ़ रहे हैं. कैंपेन के लिए अभी भी 4 दिन बाकी हैं. हम अपने रूटीन में कुछ भी बदलाव नहीं करने जा रहे हैं. अपने अभियान में हम हर उस जगह जाएंगे, जहां हमें जाना है और जनता तक अपना मैसेज पहुंचाएंगे. हां, यह जरूर कहना चाहता हूं, मेरे गनमैन को पीटा गया, जिसे केरल पुलिस ने हायर किया था, इसलिए पुलिस को जो भी एक्शन लेना होगा, वह लेगी.

शशि थरूर के कार का रास्ता रोक कर किया गया हमला

कांग्रेस सांसद शशि थरूर की कार पर शुक्रवार शाम 7:30 बजे हमला हुआ था. उस वक्त शशि थरूर मलप्पुरम जिले में थे और कांग्रेस नेता अनिल कुमार के एक चुनावी कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे. एक पुल के पास जाम लगी हुई थी, जब शशि थरूर के गार्ड्‌स रास्ता क्लियर कराने की कोशिश करने लगे, तो उनके काफिले पर हमला हुआ. शशि थरूर के सुरक्षा गार्ड्‌स को पीटा भी गया, जिसमें वे घायल भी हो गए हैं.

थरूर ने किया चुनाव में जीत का दावा

शशि थरूर ने कहा कि 100 हमारे लिए एक जरूरी है. हम जनता से बहुमत मांग रहे हैं. फिर चाहे वो 85 हो या 90 हो, मैं यह कहना चाहता हूं जबतक हमारे पास बहुमत होगा, हम जनता के लिए काम करेंगे. मुझे ऐसा लगता है कि केरल की जनता बदलाव चाहती है, पिछले दस साल से यहां की जनता परेशान है और वो बदलाव चाहती है. मुझे पूरी उम्मीद है कि यूडीएफ गठबंधन को इस चुनाव में जनता अपना बहुमत देगी. हम प्रदेश में एक अच्छा बदलाव लाना चाह रहे हैं. केरल में 9 अप्रैल को मतदान होना है और चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित होगा.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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