क्या भारतीय वायुसेना की महिला अधिकारी शक्ति शर्मा को जानते हैं आप? जिन्होंने पहली बार संभाला है एयर वाइस मार्शल का पद

भारतीय वायुसेना के इतिहास में एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा ने इतिहास रचा है. वह इंडियन डिफेंस सर्विसेज में एयर वाइस मार्शल या इसके समकक्ष पद प्राप्त करने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं. इसकी जानकारी इंडियन एयर फोर्स के आधिकारिक एक्स हैंडल से मंगलवार को दी गई.

पीटीआई न्यूज के अनुसार वायुसेना के अधिकारियों ने बताया कि शक्ति शर्मा ने एक सितंबर को वायुसेना मुख्यालय में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (शिक्षा) का पद संभाला. इससे पहले शक्ति शर्मा एयर कमोडोर के पद पर कार्यरत थीं.


शक्ति शर्मा को 1994 में वायुसेना की शिक्षा इकाई में कमीशन मिला

शक्ति शर्मा की नियुक्ति पर रक्षा मंत्रालयकी ओर से कहा गया कि भारतीय वायु सेना के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा भारतीय रक्षा बलों में एयर वाइस मार्शल (या उसके समकक्ष) का पद हासिल करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं हैं. बयान के मुताबिक एवीएम शर्मा को 18 जून, 1994 को वायुसेना की शिक्षा इकाई में कमीशन मिला था और वह अपनी नयी भूमिका के लिए काफी अनुभव लेकर आई हैं. उन्हें प्रशिक्षण केंद्रों, वायुसेना के अड्डों, कमान मुख्यालयों और वायुसेना मुख्यालयों में अलग-अलग जगहों पर काम करने का अनुभव है.

शान के साथ आसमान छूने के लिए प्रेरित करती हैं शक्ति शर्मा

मंत्रालय ने बताया कि अपने पूरे करियर के दौरान शक्ति शर्मा ने कई अहम संस्थागत अभियानों का नेतृत्व किया है. इनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर और पुणे विश्वविद्यालय में वायुसेना की उत्कृष्टता पीठ की स्थापना शामिल है. जिनका उद्देश्य शैक्षणिक और रणनीतिक रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है. उन्होंने तीनों सेनाओं की पहली महिला अधिकारी के तौर पर सैनिक स्कूल की कमान संभालकर इतिहास भी रचा. उन्होंने सैनिक स्कूल, कपूरथला में प्रिंसिपल के तौर पर काम किया.बयान में कहा गया कि यह अहम उपलब्धि भारतीय रक्षा बलों में महिला अधिकारियों की यात्रा का एक नया अध्याय है. तीन दशकों से अधिक समय की शानदार सेवा के साथ, वह वायुसेना के आदर्श वाक्य पीढ़ियों को शान के साथ आसमान छूने के लिए प्रेरित करती रही हैं.

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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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