जम्मू-कश्मीर: पुंछ हमले को संजय राउत ने पुलवामा अटैक से जोड़ा, कह दी ये बात

jammu kashmir terrorist attack: वीडियो में नजर आ रहा है कि सुरक्षाबल के जवान हथियार के साथ आतंकियों की तलाशी में लगे हुए हैं. जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में गुरुवार को आतंकी हमले में पांच जवान शहीद हो गये जिसके बाद से इलाके में आतंकियों की तलाश तेज है.

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में गुरुवार को आतंकी हमले में पांच जवान शहीद हो गये. हथियारों से लैस आतंकवादियों द्वारा सेना के दो वाहनों पर घात लगाकर हमला किया गया. इस हमले में दो अन्य घायल हुए हैं. हमले के बाद सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को इलाके के वन क्षेत्र में व्यापक घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया. इस तलाशी अभियान का वीडियो न्यूज एजेंसी एएनआई ने जारी किया है. वीडियो में नजर आ रहा है कि सुरक्षाबल के जवान हथियार के साथ आतंकियों की तलाशी में लगे हुए हैं. हमले को लेकर एक अधिकारी ने कहा कि इलाके की हवाई निगरानी भी की जा रही है तथा आतंकवादियों का पता लगाने के लिए श्वान दस्ते को भी लगाया गया है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की शाखा पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) ने घात लगाकर किए गए इस हमले की जिम्मेदारी ली है.

हमले के बाद खबर आई थी कि इलाके में रात की घेराबंदी की गई है. आज सुबह व्यापक घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू हो गया है. गोलीबारी में शामिल आतंकवादियों का पता लगाने के लिए क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी तैनात किया गया है. आपको बता दें कि गुरुवार को सैन्यकर्मियों को एक घेराबंदी और तलाशी अभियान स्थल पर ले जा रहे वाहनों पर सुरनकोट थाना क्षेत्र में ढेरा की गली और बुफलियाज के बीच धत्यार मोड़ पर अपराह्न करीब पौने चार बजे हमला किया गया.

राजनीतिक प्रतिक्रिया आने लगी हमले के बाद

इस हमले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है. जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले पर शिवसेना(UBT) सांसद संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि ये बहुत ही गंभीर विषय है. यहां संसद में लोग घुसकर हमला करते हैं, उन्हें(बीजेपी) उसकी खबर नहीं है. वहीं कश्मीर में आतंकी घुसकर हमारे जवानों पर हमला करते हैं, उन्हें उसकी भी खबर नहीं है… गुरुवार को हुआ हमला पुलवामा हमले की पुनरावृत्ति है… वे(बीजेपी) 370 हटाने का जश्न मना रहे हैं… जवानों की रक्षा कौन करेगा?

कहां किया गया हमला

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में गुरुवार को हथियारों से लैस आतंकवादियों द्वारा सेना के दो वाहनों पर घात लगाकर हमले किये गये जिसमें पांच सैनिक शहीद हो गए और दो अन्य घायल हो गए. इस हमले को लेकर अधिकारियों ने बताया कि शहीद हुए दो सैनिकों के शव क्षत-विक्षत थे. सैन्यकर्मियों को एक घेराबंदी और तलाशी अभियान स्थल पर ले जा रहे वाहनों पर सुरनकोट थाना के अंतर्गत आने वाले ढेरा की गली और बुफलियाज के बीच धत्यार मोड़ पर करीब पौने चार बजे हमला किया गया.

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इस साल मुठभेड़ों में अब तक 19 सुरक्षाकर्मी शहीद

मुठभेड़ के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो राजौरी, पुंछ और रियासी जिलों में इस साल मुठभेड़ों में अब तक 19 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं और 28 आतंकवादी मारे गए हैं. इन मुठभेड़ों में कुल 54 लोग भी मारे गए हैं. इससे पहले अक्टूबर 2021 में वन क्षेत्र में आतंकवादियों के दो अलग-अलग हमलों में नौ सैनिक शहीद हो गए थे. चमरेर में 11 अक्टूबर को एक जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) सहित पांच सैन्यकर्मी शहीद हुए थे, जबकि 14 अक्टूबर को एक निकटवर्ती जंगल में एक जेसीओ और तीन सैनिकों ने जान गंवाई थी.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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