Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से दिखेगी भारत की संयुक्त सैन्य ताकत

ब्रांड इंडिया डिफेंस के तहत प्रस्तुत की जाने वाली झांकी थल सेना, नौसेना और वायुसेना की एकजुटता, स्वदेशी हथियार प्रणालियों और नई सुरक्षा नीति का सशक्त संदेश देगा. झांकी यह भी दर्शाएगी कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियां अब केवल आगे बढ़ ही नहीं रहीं, बल्कि नेतृत्व कर रही हैं.

नयी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान सशस्त्र बल ‘ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्तता से विजय’ एक त्रिपक्षीय झांकी प्रस्तुत करेंगे. यह झांकी राष्ट्र के विकसित सैन्य सिद्धांत का एक सशक्त और आधिकारिक प्रतिनिधित्व होगी, जो सटीकता, एकीकरण और स्वदेशी श्रेष्ठता की ओर निर्णायक परिवर्तन का प्रतीक है. यह भारत की इस बात की प्रबल पुष्टि है कि निर्णायक, संयुक्त और आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति का युग आ चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न से प्रेरित, ऑपरेशन सिंदूर ने आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती ताकत और विकसित भारत @ 2047 की ओर देश की अटूट यात्रा का उदाहरण पेश किया, एक ऐसा भविष्य जो आत्मनिर्भर, समन्वित और अटूट रक्षा क्षमता से परिभाषित होगा. 

यह झांकी तीनों सेनाओं के तालमेल के गतिशील और सिलसिलेवार चित्रण के ज़रिए इस कहानी को जीवंत करती है. झांकी देश की नयी सैन्य सोच को दर्शाती है, जिसमें सेना के तीनों अंगों का आपसी समन्वय और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के तहत निर्णायक भूमिका निभाया गया.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक झांकी का आरंभ भारतीय नौसेना की समुद्री प्रभुता से होगा, जो समुद्री मोर्चे पर नियंत्रण और दुश्मन की गतिविधियों को निष्क्रिय करने की क्षमता को दर्शाता है. इसके बाद भारतीय थलसेना की शक्ति का प्रदर्शन होगा, जहां एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों के जरिए सटीक और नियंत्रित प्रहार को दिखाया जाएगा. इनके पीछे आकाश वायु रक्षा प्रणाली खड़ी है, जो भारत की बहुस्तरीय और एकीकृत वायु रक्षा कवच तथा अभेद्य हवाई क्षमता का प्रतीक है.

ऑपरेशन सिंदूर की आक्रामक रणनीति से परिचय 

झांकी के केंद्र में ऑपरेशन सिंदूर की आक्रामक रणनीति को दर्शाया गया है, जो भारत की नयी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति-त्वरित प्रतिक्रिया, नियंत्रित आक्रामकता और अचूक सटीकता-को रेखांकित करती है. हारोप मिसाइल  द्वारा दुश्मन के एयर डिफेंस रडार को नष्ट करने का दृश्य मानवरहित युद्ध क्षमता में भारत की बढ़त को दिखाता है. इसके बाद राफेल विमान द्वारा स्कैल्प मिसाइल से आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक और एसयू-30 एमकेआई से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का प्रहार भारत की गहरी और तीव्र मारक क्षमता को प्रदर्शित करता है. 

यह ऑपरेशन भारत के इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क की बढ़ी हुई पहुंच के साथ अपने चरम पर पहुंचता है. एस-400 सिस्टम, 350 किलोमीटर की सबसे लंबी दूरी पर ऑपरेशन को अंजाम देते हुए, दुश्मन के एयरबोर्न अर्ली-वार्निंग प्लेटफॉर्म को बेअसर कर देता है, और एक साफ संदेश देता है- भारत सबसे पहले पता लगाता है, सबसे पहले फैसला करता है और सबसे पहले खत्म करता है.

एकजुटता और इंटीग्रेशन की परिपक्वता

ऑपरेशन सिंदूर का हर चरण एकजुटता और इंटीग्रेशन की परिपक्वता को दिखाता है, जिसमें सभी क्षेत्रों में इंटेलिजेंस को मिलाया गया, टारगेट सटीकता से चुने गए और कम से कम नुकसान के साथ मकसद हासिल किए गए. यह कहानी एक मजबूत राष्ट्रीय संकल्प को पक्का करती है कि आतंकवाद और खून-खराबा एक साथ नहीं चलेंगे, और जो लोग आतंकवाद को बढ़ावा देंगे या पनाह देंगे, उन्हें तेज, सटीक और भारी नतीजों का सामना करना पड़ेगा. 

ब्रांड इंडिया डिफेंस की ओर से पेश की गई यह झांकी इस बात पर ज़ोर देती है कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियां न सिर्फ़ बराबरी कर रही हैं, बल्कि वे आगे बढ़ रही हैं. यह एक ऐसे राष्ट्र को दिखाती है जहां तीनों सेनाओं के बीच तालमेल, नागरिक-सैन्य तालमेल और रियल-टाइम ऑपरेशनल कोआर्डिनेशन विश्वसनीय शक्ति प्रदर्शन की रीढ़ हैं. संक्षेप में, ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ़ एक सैन्य जवाब नहीं है, यह भारत की रणनीतिक घोषणा है कि एकजुटता से जीत अब उसकी ऑपरेशनल पहचान और खास पहचान है

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By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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