Red Fort Blast: 2022 से रची जा रही थी साजिश? NIA चार्जशीट में उमर उन नबी को बताया मास्टरमाइंड, ऐसे बना कार बम

Red Fort Blast: लाल किला ब्लास्ट मामले में NIA की चार्जशीट ने साजिश की कई परतें खोली हैं. जांच एजेंसी ने उमर उन नबी की भूमिका से लेकर कार को VBIED में बदलने, विस्फोटक सामग्री जुटाने और नेटवर्क की तैयारी तक कई अहम आरोप दर्ज किए हैं.

Red Fort Blast: लाल किला ब्लास्ट की जांच में NIA की चार्जशीट ने धमाके के तरीके को लेकर कई और अहम जानकारी सामने आई है. एजेंसी के मुताबिक विस्फोट में इस्तेमाल Hyundai i20 को साधारण कार की तरह नहीं, बल्कि Vehicle-Borne Improvised Explosive Device यानी VBIED के रूप में तैयार किया गया था. इसका मतलब वाहन को ही विस्फोटक उपकरण में बदल दिया गया था.

फॉरेंसिक जांच के दौरान कार के मलबे और घटनास्थल से जुटाए गए नमूनों में TATP, अमोनियम नाइट्रेट और पोटैशियम नाइट्रेट जैसे विस्फोटक पदार्थों के निशान मिलने की बात चार्जशीट में कही गई है. एजेंसी ने धमाके में मारे गए उमर उन नबी को कथित तौर पर साजिश का मास्टरमाइंड और एक पुनर्जीवित आतंकी मॉड्यूल का ऑपरेशनल इंचार्ज बताया है. NIA के मुताबिक इस नेटवर्क को तैयार करने की कोशिश 2022 से चल रही थी.

उमर उन नबी को बताया कथित मास्टरमाइंड

NIA की चार्जशीट के मुताबिक उमर उन नबी, जिसे पिंडा (Pinda) और राहुल बट नामों से भी जाना जाता था, कथित तौर पर अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) के एक पुनर्जीवित मॉड्यूल का ऑपरेशनल इंचार्ज था. जांच एजेंसी का आरोप है कि वह 2022 की शुरुआत से इस निष्क्रिय मॉड्यूल को दोबारा खड़ा करने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए लोगों का नेटवर्क तैयार करने में जुटा था.

कट्टरपंथ की ओर लोगों को ले जाने का आरोप

चार्जशीट में NIA ने आरोप लगाया है कि नबी लोगों को कट्टरपंथ की ओर ले जाने, कथित तौर पर शहादत से जुड़े विचारों का महिमामंडन करने और नए लोगों को नेटवर्क से जोड़ने में भूमिका निभाता था. एजेंसी का दावा है कि वह गुप्त बैठकों की व्यवस्था करता था, प्रशिक्षण में मदद करता था और मॉड्यूल से जुड़े लॉजिस्टिक्स का प्रबंधन भी करता था.

अफगानिस्तान जाने की योजना का भी जिक्र

NIA की चार्जशीट में नबी की कथित तौर पर अफगानिस्तान जाने की योजना का भी जिक्र किया गया है. जांच के मुताबिक मॉड्यूल से जुड़े लोग ऐसे साहित्य को अपने पास रखते और साझा करते थे, जिसमें हिंसक संघर्ष और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े विचारों का प्रचार किया गया था. तफ्तीश के दौरान NIA ने कई दस्तावेजों की जांच की. एजेंसी के मुताबिक इन सामग्रियों में हिंसक गतिविधियों को उचित ठहराने, गोपनीय तरीके से काम करने, अपनी पहचान छिपाने और अलग-अलग तरह के हमलों से जुड़ी बातें शामिल थीं.

  • जांच के दौरान जिन सामग्रियों की जांच की गई उनमें जिहाद की परिभाषा, जिहाद की आवश्यकताएं, जिहाद के 21 उद्देश्य, जिहाद में सेवा और भागीदारी के 39 तरीके और जिहाद का समर्थन करने के 44 तरीके शीर्षक वाले दस्तावेज शामिल थे.
  • चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी एक-दूसरे के संपर्क में रहने के लिए सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन का इस्तेमाल करते थे.

फंड, हथियार और ठिकानों की व्यवस्था का आरोप

NIA के अनुसार नबी की भूमिका केवल लोगों को जोड़ने तक सीमित नहीं थी. एजेंसी ने उस पर फंड की व्यवस्था करने, अवैध हथियार जुटाने और मॉड्यूल के सदस्यों के साथ-साथ साजिश से जुड़ी सामग्री के लिए जगह उपलब्ध कराने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया है. चार्जशीट में दावा किया गया है कि जम्मू-कश्मीर और दिल्ली-NCR में बैठकें की गईं, जहां सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया और कथित आतंकवादी गतिविधियों की तैयारियां की गईं.

सेकेंड हैंड कार को बनाया गया VBIED

NIA के मुताबिक 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास विस्फोट करने वाले वाहन को Vehicle-Borne Improvised Explosive Device यानी VBIED में बदला गया था. चार्जशीट में आरोप है कि नबी और एक सह-आरोपी ने साजिश के तहत एक सेकेंड हैंड कार खरीदी थी.

धमाके के समय कार में मौजूद था नबी

NIA के अनुसार धमाके के समय उमर उन नबी कार के अंदर ही मौजूद था. धमाके वाली जगह से मिले जैविक नमूनों की DNA जांच के आधार पर उसकी पहचान की गई. फॉरेंसिक जांच में घटनास्थल से मिली सामग्री में TATP और अमोनियम नाइट्रेट के अवशेष मिलने की बात भी कही गई है.

कार के अंदर से शुरू किया गया था विस्फोट?

चार्जशीट के मुताबिक फॉरेंसिक साक्ष्यों से एजेंसी इस नतीजे पर पहुंची कि विस्फोटक उपकरण को वाहन के अंदर से एक कमांड मैकेनिज्म के जरिए सक्रिय किया गया था. यह धमाका 10 नवंबर 2025 को शाम करीब 6:50 बजे लाल किले के पास हुआ था.

11 लोगों की हुई थी मौत

NIA की जांच के मुताबिक इस धमाके में 11 लोगों की मौत हुई और 29 लोग घायल हुए थे. विस्फोट से आसपास की संपत्तियों और वाहनों को भी काफी नुकसान पहुंचा था. एजेंसी का आरोप है कि यह हमला किसी एक घटना तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बड़े कथित आतंकी नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने, लोगों को कट्टरपंथ की ओर ले जाने और हमलों की तैयारी से जुड़ी व्यापक साजिश थी.

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लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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