पत्रकारों से बातचीत करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि जब पेपर लीक होते हैं, तो उन्हें सेना के जरिए भेजा जाता है क्योंकि सरकार को अपने अधिकारियों पर भरोसा नहीं है .
उन्होंने आगे कहा, "राम मंदिर के चढ़ावे का हिसाब-किताब देखने के लिए एक पूर्व सैन्य अधिकारी को सीईओ बनाया गया है. इसका सीधा मतलब है कि सरकार और पीएम मोदी को अब बीजेपी, आरएसएस और वीएचपी के लोगों पर भरोसा नहीं रहा, क्योंकि वे चोरी करते रंगे हाथों पकड़े गए हैं." बघेल ने दावा किया कि ट्रस्ट के चेहरे बदलने से श्रद्धालुओं को ठेस पहुंची आस्था की भरपाई नहीं होगी.
अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी दागे सवाल
इमरान मसूद: उन्होंने सवाल उठाया कि मंदिर का प्रबंधन साधु-संतों का काम है. उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर में पैसों का प्रवाह देखकर आरएसएस की नीयत खराब हो रही है. अजय राय: यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने पूछा कि क्या नए सीईओ की नियुक्ति से चोरी हुआ पैसा वापस आएगा? उन्होंने कहा कि भगवान राम की जन्मभूमि पर किसी शंकराचार्य को यह जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए थी.
कौन हैं नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा?
एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा वायुसेना में 39 वर्षों का लंबा अनुभव रखते हैं और 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख रह चुके हैं. उन्हें उत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया है. ट्रस्ट की बैठक में प्रशासनिक सुधार, एसआईटी जांच की प्रगति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़े मामलों के बीच इस नई व्यवस्था पर मुहर लगाई गई.
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