Rajya Sabha: उपसभापति के पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुए हरिवंश

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यसभा के उपसभापति के तौर पर लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना यह बताता है कि बीते हुए कालखंड में उनके अनुभव का सदन को जो लाभ मिला है, सबको साथ लेकर चलने का प्रयास रहा है, उसपर सदन ने एक बार फिर मुहर लगाने का काम किया है. हरिवंश के नेतृत्व में सदन की शक्ति को और अधिक प्रभावी होते हुए भी देखा है और केवल सदन की कार्यवाही का संचालन ही नहीं, बल्कि अपने जीवन के अनुभव से सदन को समृद्ध करने का काम किया है.

Rajya Sabha: राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए हरिवंश शुक्रवार को निर्विरोध निर्वाचित हो गए. उपसभापति के तौर पर उनका तीसरा कार्यकाल है. जबकि राष्ट्रपति की ओर से नामित सदस्यों में से वह पहले सदस्य हैं, जिन्हें उपसभापति का पद संभालने का गौरव प्राप्त हुआ है. विपक्ष की ओर से कोई प्रत्याशी खड़ा न किये जाने के बाद उनका निर्विरोध चुना जाना तय था. उपसभापति के तौर पर हरिवंश के चुने जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए कहा कि उनका तीसरे कार्यकाल के लिए चुने जाना अनुभव और सहज कार्यशैली का सम्मान है. प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यसभा के उपसभापति के तौर पर लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना यह बताता है कि बीते हुए कालखंड में उनके अनुभव का जो सदन को लाभ मिला है, सबको साथ लेकर चलने का प्रयास रहा है, उसपर सदन ने एक बार फिर मुहर लगाने का काम किया है. हरिवंश के नेतृत्व में सदन की शक्ति को और अधिक प्रभावी होते हुए भी देखा है और केवल सदन की कार्यवाही का संचालन ही नहीं, बल्कि अपने जीवन के अनुभव से सदन को समृद्ध करने का काम किया है. 

प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश का जन्म उत्तर प्रदेश के गांव में हुआ और सहज रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण अपने गांव के विकास में छात्र जीवन से ही कुछ ना कुछ करते रहे. शिक्षा-दिक्षा काशी में हुई. 17 अप्रैल का खास महत्व है और यह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जन्म जयंती भी है. इस दिन तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति का दायित्व संभालना चंद्रशेखर के साथ जुड़ाव, उनके प्रति लगाव को दिखाता है. उन्होंने चंद्रशेखर के जीवन पर किताबें भी लिखी हैं और उनके जीवन को नयी पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश का सार्वजनिक जीवन केवल संसदीय कामों तक सीमित नहीं रहा है. उन्होंने पत्रकारिता के उच्च मानदंड स्थापित किया. लेखनी में धार, वाणी और व्यवहार में सौम्‍यता और शिष्टता भरी रहती है. जब गुजरात में था, तब भी उनकी लेखों को पढ़ने की मेरी आदत रही थी और देखता था कि वह अपना पक्ष बड़ी दृढ़ता के साथ रखते थे. उनके लेख पढ़कर यह अनुभव करता था कि काफी अध्ययन के बाद उसका निचोड़ उस लेख में प्रकट होता था. पत्रकारिता में भी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का उनका निरंतर प्रयास एक सफल प्रयास रहा. लोकसभा हो या राज्यसभा के नये सांसद हरिवंश से बहुत कुछ सीख सकते हैं. 

युवाओं को गंभीर विषयों पर किया जागरूक

प्रधानमंत्री ने कहा कि उपसभापति के तौर पर हरिवंश ने सदन को कैसे चलाया, सदन में सदस्य के तौर पर क्या योगदान दिया, इस बारे में हम स्वाभाविक रूप से एक सकारात्मक चर्चा करते रहे. हरिवंश अपने समय का उपयोग सबसे अधिक युवाओं के बीच में बिताना पसंद करते हैं और युवाओं में लगातार गंभीर विषयों पर जागरूकता बनाने का काम करते हैं. वर्ष 2018 में राज्यसभा के उपसभापति बनने के बाद कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में 350 कार्यक्रम किए. विकसित भारत का सपना युवाओं के लिए भी क्यों होना चाहिए, इस मूल विषय को अलग-अलग तरीके से छात्रों को बताते रहे. निजी जीवन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 1994 में हरिवंश पहली बार विदेश यात्रा पर अमेरिका गए तो उनसे पूछा गया कि आप कहीं और जाना चाहते हैं, कुछ करना चाहते हैं तो उन्होंने वहां की यूनिवर्सिटी में जाने की बात कही. वे यह जानना चाहते थे कि विकसित देश की यूनिवर्सिटी से जो निकलता है, वह भारत की यूनिवर्सिटी से क्यों नहीं निकल सकता. प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश ने सांसद के तौर पर एमपीलैड फंड का प्रयोग शिक्षा क्षेत्र और युवा पीढ़ी के हित में किया. फंड का प्रयोग विश्वविद्यालय, शिक्षण संस्थानों में ऐसे अध्ययन केंद्र में स्थापित किया जिसका प्रभाव लंबे अरसे तक रहने वाला है और उसमें भी उन्होंने प्रोजेक्ट ओरिएंटेड, समस्या के समाधान को केंद्र में रखा. जैसे लुप्त होती जा रही भारतीय भाषाओं, उनके संरक्षण के लिए उन्होंने आईआईटी पटना में एक अध्ययन केंद्र के लिए एमपीलैड फंड का उपयोग किया. 

सभी के लिए सम्मानीय 

वही राज्य सभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि हरिवंश का उपसभापति के तौर पर निर्विरोध चुनाव सिर्फ प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है बल्कि सभी दलों का उनके प्रति विश्वास व सम्मान का प्रतीक है. तीसरी बार उपसभापति बनना बड़ी बात है और यह दिखाता है कि उन्होंने जिम्मेदारी का पालन पूरी निष्ठा और संसदीय परंपरा का पालन करते हुए किया है. पीठासीन अधिकारी के तौर पर संतुलित और संयमित व्यवहार के कारण वे सभी के लिए सम्मानीय बन गए है. सदन का निर्विरोध होकर हरिवंश का चयन करना लोकतंत्र की ताकत का दिखाता है. विचारों में भिन्नता से संवाद का स्तर बेहतर होता है. सभापति ने कहा कि उपसभापति के पद पर हरिवंश को सार्वजनिक जीवन के अनुभव के कारण सदन का संचालन करना आसान हो जाता है. गर्मागर्म बहस के दौरान भी उनका सौम़्य स्वभाव माहौल को शांत कर देता है. राज्यसभा का संचालन करना आसान काम नहीं है, इसके बावजूद हरिवंश ने जिम्मेवारी का शानदार निर्वहन किया है. राज्यसभा के नये सदस्य हरिवंश के काफी कुछ सीख सकते हैं.


इस मौके पर नवनिर्वाचित उपसभापति हरिवंश ने कहा कि जीवन में कुछ क्षण ऐसे आते हैं, जिसमें भावना प्रवाह में रहती है. मेरे लिए भी यह क्षण वैसा ही है. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आभार व्यक्त किया जिन्होंने सरकार की संस्तुति पर उन्हें राज्य सभा के मेंबर के तौर पर मनोनीत किया. उन्होंने कहा कि सभी वरिष्ठ लोगों के सहयोग से वह अपनी जिम्मेदारी को शुद्ध अंतःकरण और निष्पक्षता से निभाये हैं और आगे भी निभाते रहेंगे. उन्होंने प्रधानमंत्री सहित तमाम दल के नेताओं और सांसदों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इनमें से कई सदस्यों से उन्होंने काफी कुछ सीखा है. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी आभार व्यक्त किया जिनके कारण उनका संसदीय करियर शुरू हुआ. उन्होंने उन तमाम दल के नेताओं से आग्रह किया कि एक सांसद और उपसभापति के रूप में उन लोगों ने जो स्नेह दिया है, वैसा स्नेह आगे भी बनाये रखें. गौरतलब है कि हरिवंश इससे पहले दो बार जदयू से राज्यसभा के सांसद चुने गए थे. उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को खत्म हुआ था और 10 अप्रैल को राष्ट्रपति की ओर से उन्हें राज्य सभा के लिए नामित किया गया. 

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By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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