Rajasthan Election 2023: चुनाव से पहले बढ़ रहा है बीजेपी का कुनबा, इन 16 लोगों ने थामा पार्टी का दामन

Rajasthan Election 2023 : राजस्थान की जनता कांग्रेस के कुशासन से तंग आ चुकी है और बीजेपी की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है. आज बीजेपी का परिवार बढ़ गया है और लोगों का बीजेपी के प्रति विश्वास बढ़ा है. जानें क्या बोले प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह

Rajasthan Election 2023 : राजस्थान में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले बीजेपी और कांग्रेस सक्रिय हो गई है. इस बीच पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं समेत सोलह लोगों ने बुधवार को विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गये. पार्टी की ओर से इस बाबत जानकारी दी गई है.

बीजेपी की ओर से बयान जारी किया गया और बताया गया कि बीजेपी के विकास कार्यों और जनकल्याणकारी नीतियों में विश्वास जताते हुए पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों और कांग्रेस समेत राजनीतिक दलों के कुल 16 लोगों ने प्रदेश कार्यालय में बीजेपी का दामन थामा.

जनता कांग्रेस के कुशासन से तंग

इस अवसर पर बीजेपी के प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने कहा कि राज्य की जनता कांग्रेस के कुशासन से तंग आ चुकी है और बीजेपी की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है. उन्होंने कहा कि आज बीजेपी का परिवार बढ़ गया है और लोगों का बीजेपी के प्रति विश्वास बढ़ा है. वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि प्रदेश में अब परिवर्तन की लहर चल पड़ी है. प्रदेश की जनता अब इस तुष्टिकरण और जनविरोधी सरकार को हमेशा के लिए सत्ता से बाहर करने का संकल्प ले चुकी है.

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राजस्थान में कानून का राज नहीं बल्कि जंगलराज

वहीं टोंक में परिवर्तन यात्रा के बाद मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि राजस्थान की जनता कांग्रेस के कुशासन से परेशान है. उन्होंने कहा कि आज प्रदेश महिला अपराध और भ्रष्टाचार के मामले में शीर्ष पर है, यह कानून का राज नहीं बल्कि जंगलराज है. उधर, ब्यावर में केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने कहा कि अब यह परिवर्तन संकल्प यात्रा कांग्रेस सरकार को हमेशा के लिए सत्ता से बाहर करने का जनसंकल्प बन गई है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राजस्थान में बेरोजगारी को लेकर कई वादे किये, लेकिन उन्हें कभी पूरा नहीं किया.

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2018 के चुनाव परिणाम पर एक नजर

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं. बीजेपी और मौजूदा कांग्रेस के बीच सीधी जंग इस चुनाव में देखने को मिल सकती है. 2018 में 200 सदस्यीय सदन में कांग्रेस ने 99 सीटें जीतीं जबकि बीजेपी 73 सीट पर सिमट गयी थी. अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने निर्दलीय और बसपा के समर्थन से सरकार बनाई थी और सूबे की कमना अशोक गहलोत के हाथों में दी गयी थी. सरकार ने अपने पांच साल पूरे करने जा रही है.

क्या है राजस्थान का ट्रेंड

पिछले छह विधानसभा चुनाव का इतिहास को उठाकर देख लें तो राजस्थान का ट्रेंड समझ में आ जाता है. जनता हर साल सरकार बदल देती है.

1. अशोक गेहलोत (कांग्रेस)-17 दिसंबर 2018 से अबक

2. वसुंधरा राजे सिंधिया(बीजेपी)-13 दिसंबर 2013 से 16 दिसंबर 2018

3. अशोक गेहलोत (कांग्रेस)-12 दिसंबर 2008 से 13 दिसंबर 2013

4. वसुंधरा राजे सिंधिया (बीजेपी)-08 दिसंबर 2003 से 11 दिसंबर 2008

5. अशोक गहलोत(कांग्रेस)-01 दिसंबर 1998 से 08 दिसंबर 2003

6. भैरों सिंह शेखावत(बीजेपी)-04 दिसंबर 1993 से 29 नवंबर 1998

भाषा इनपुट के साथ

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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