राजस्थान विधानसभा चुनाव : वसुंधरा राजे का गढ़ है झालरापाटन, चुनाव जीतीं तो सीएम पद पर ठोकेंगी मजबूत दावेदारी

राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीटें हैं, लेकिन मतदान 199 सीट पर ही होगा क्योंकि श्रीकरणपुर विधानसभा सीट पर कांग्रस के उम्मीदवार के निधन के बाद वहां चुनाव स्थगित कर दिया गया है. राजस्थान चुनाव में जिन विधानसभा क्षेत्रों पर लोगों की खास नजर रहेगी उनमें से एक है झालरापाटन विधानसभा सीट.

राजस्थान विधानसभा चुनाव : लोकसभा चुनाव 2024 से पहले देश में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. 25 नवंबर को राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है. राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीटें हैं, लेकिन मतदान 199 सीट पर ही होगा क्योंकि श्रीकरणपुर विधानसभा सीट पर कांग्रस के उम्मीदवार के निधन के बाद वहां चुनाव स्थगित कर दिया गया है. राजस्थान चुनाव में जिन विधानसभा क्षेत्रों पर लोगों की खास नजर रहेगी उनमें से एक है झालरापाटन विधानसभा सीट, जहां से बीजेपी की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे चुनाव लड़ रही हैं.

वसुंधरा राजे झालरापाटन सीट से पांचवीं बार चुनावी मैदान में हैं. यह सीट वसुंधरा राजे का गढ़ माना जाता है. वे लगातार चार बार यहां से चुनाव जीत चुकी हैं. इस बार के चुनाव में वे नाराज चल रही थीं, यही वजह है कि बीजेपी ने जब उम्मीदवारों की सूची जारी की तो पहली सूची में उनका नाम सामने नहीं आया, हालांकि दूसरी सूची में वसुंधरा राजे का नाम था और वे अपनी परंपरागत सीट से ही पांचवीं बार चुनावी मैदान में हैं. वसुंधरा राजे को सीएम फेस घोषित तो नहीं किया गया है, लेकिन अगर बीजेपी यहां चुनाव जीतती है तो वसुंधरा की मजबूत दावेदारी सीएम पद को लेकर रहेगी.

झालरापाटन सीट से इस बार वसुंधरा राजे के सामने कांग्रेस ने फिर नया उम्मीदवार दिया है. कांग्रेस ने रामलाल चौहान को यहां से वसुंधरा राजे के खिलाफ मैदान में उतारा है. झालरापाटन सीट राजस्थान के झालावाड़ जिले के अंतर्गत आता है. इस सीट पर 2003 से ही वसुंधरा राजे का दबदबा रहा है. वसुंधरा राजे प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री भी रही हैं. झालरापाटन सीट से वसुंधरा राजे ने 2018 के चुनाव में कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह को 34,980 वोटों से हराया था.

गौरतलब है कि झालावाड़ वसुंधरा राजे का गृहक्षेत्र हैं और उनके परिवार का यहां दबदबा है. उनके बेटे दुष्यंत कुमार इस सीट से सांसद हैं. वसुंधरा राजे के परिवार का यहां इतना प्रभाव है कि कोई जातिगत समीकरण और मुद्दे यहां बहुत प्रभाव नहीं डालते हैं.

हालांकि अगर आंकड़ों पर गौर करें तो वसुंधरा राजे को पिछली दफा कांग्रेस के उम्मीदवार मानवेंद्र सिंह ने कड़ी टक्कर दी थी. चार बार वसुंधरा राजे यहां से चुनाव जीती हैं, लेकिन उनकी जीत में वोटों की गिनती लगातार कम हुई है. इस बार के चुनाव में कांग्रेस के रामलाल चौहान उन्हें कितनी टक्कर देंगे, यह तो आने वाला वक्त ही बता पाएगा.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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