Railway: रेलवे सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की हो रही है पहल

देश के 6609 स्टेशन पर ट्रैक सर्किटिंग का काम पूरा हो चुका है. ट्रैक की सुरक्षा परखने के लिए अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग की जाती है साथ ही रेलवे पुलों की सुरक्षा के लिए ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम बनाया गया है.

Railway : भारतीय रेलवे का नेटवर्क दुनिया में अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथे स्थान पर है. रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, आधुनिकीकरण, ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने और सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए हैं. हाल के दिनों में कुछ रेल दुर्घटनाओं के कारण यात्री सुरक्षा पर सवाल भी उठ रहे हैं. हालांकि सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों के कारण पहले के मुकाबले रेल हादसों में कमी आयी है. रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2000-01 में कुल 473 ट्रेन हादसे हुए थे, जो वर्ष 2022-23 में घटकर 40 हो गया. यही नहीं वर्ष 2004 से 2014 के दौरान सालाना औसतन 171 ट्रेन हादसे हुए जो वर्ष 2014 से 2024 के दौरान कम होकर 68 हो गये. यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा के लिए वर्ष 2017-18 में एक लाख करोड़ रुपये का राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष बनाया गया था. इस कोष के तहत अगले पांच साल में महत्वपूर्ण सुरक्षा संपत्तियों को अपग्रेड किया गया या फिर बदला गया. वर्ष 2017-18 से वर्ष 2021-22 के दौरान इस मद में 1.08 लाख करोड़ रुपये खर्च हो चुका है.

सुरक्षा कोष का आवंटन बढ़ा

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वर्ष 2022-23 में 45 हजार करोड़ रुपये का आवंटन कर इस कोष को पांच साल के लिए बढ़ा दिया. ट्रेनों की आपसी टक्कर रोकने के लिए कवच सिस्टम लगाया जा रहा है. मौजूदा समय में 1465 किलोमीटर रूट और 121 लोकोमोटिव में कवच सिस्टम लगाया जा चुका है. सरकार की कोशिश हर साल छह हजार किलोमीटर ट्रैक को कवच सिस्टम में शामिल करना है. सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए 31 मई तक 6586 स्टेशनों को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग मुहैया कराया जा चुका है. साथ ही बिजी रेलवे रूट पर 4111 किलोमीटर में ऑटोमेटिक ब्लाक सिग्नलिंग की व्यवस्था की जा चुकी है. 

अल्ट्रासोनिक टेस्ट से ट्रैक की सुरक्षा 

सभी लोकोमोटिव में विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस, जीपीएस आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाया गया है. ट्रैक सेफ्टी के लिए आधुनिक ट्रैक रिकॉडिंग कार का प्रयोग किया गया जा रहा है. देश के 6609 स्टेशन पर ट्रैक सर्किटिंग का काम पूरा हो चुका है. ट्रैक की सुरक्षा परखने के लिए अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग की जाती है. रेलवे पुलों की सुरक्षा के लिए ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम बनाया गया है. पुलों की जांच के लिए नयी तकनीक का प्रयोग करने के साथ ड्रोन से जल स्तर की निगरानी, नदियों की थ्री डी स्क्रीनिंग की जा रही है. रोलिंग स्टाक की सुरक्षा बेहतर करने के लिए आधुनिक तकनीक जैसे ऑनलाइन मॉनिटरिंग ऑफ रोलिंग स्टाक को अपनाया गया है.

 सुरक्षा पर खर्च किये गये लगभग दो लाख करोड़

अगर सुरक्षा पर होने वाले खर्च की बात करें तो वर्ष 2004-14 के दौरान इस मद में 70273 करोड़ रुपये खर्च किए गए जो वर्ष 2014-24 के दौरान बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया. ट्रैक की सुरक्षा पर होने वाला खर्च इस अवधि में लगभग 2.5 गुणा बढ़ गया. पटरियों की टूटने की संख्या में बड़ी गिरावट आयी है.

एलबीएच कोच के निर्माण में 15 गुणा की वृद्धि

मानव रहित क्रासिंग, सड़कों के ऊपर ब्रिज, इंटरलॉकिंग और अन्य सुरक्षा उपायों में होने वाला खर्च कई गुणा बढ़ा है. इस दौरान एलबीएच कोच का निर्माण 15.8 गुणा बढ़ा. एसी कोच में फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम यूपीए सरकार के दौरान शून्य था जो 2024 में बढ़कर 19271 हो गया है. उसी तरह पहले नॉन एसी कोच में भी आग से निपटने की कोई व्यवस्था नहीं थी, लेकिन अब फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम की संख्या 66840 हो गयी है. 

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Published by: Anjani kumar singh

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