नौसैनिक हवाईअड्डे पर राहुल गांधी के विमान को उतरने की नहीं दी गई अनुमति! कांग्रेस ने कह दी ये बात

नौसैनिक स्टेशन पर निजी जेट विमानों को उतारे जाने की अनुमति देने का निर्णय रक्षा मंत्रालय द्वारा किया गया था. हालांकि, उन्होंने इस विषय में विस्तार से जानकारी नहीं दी. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी केरल के दौरे पर हैं और शुक्रवार को कोच्चि में उनके दो कार्यक्रम निर्धारित हैं.

कोच्चि: कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि रक्षा मंत्रालय ने उस विमान को नौसैनिक हवाई अड्डे पर उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया जिसमें पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सवार थे. एर्नाकुलम के जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के अध्यक्ष मोहम्मद शियास ने आरोप लगाया कि शुरू में नौसैनिक हवाई अड्डे पर विमान को उतारने की अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में यह अनुमति वापस ले ली गयी. उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इसके बाद, कन्नूर से राहुल गांधी को लेकर आ रहे विमान को पास के नेदुंबसेरी में ‘कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा लिमिटेड’ (सीआईएएल) की ओर मोड़ दिया गया. एक आधिकारिक सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि नौसैनिक स्टेशन पर निजी जेट विमानों को उतारे जाने की अनुमति देने का निर्णय रक्षा मंत्रालय द्वारा किया गया था. हालांकि, उन्होंने इस विषय में विस्तार से जानकारी नहीं दी. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी केरल के दौरे पर हैं और शुक्रवार को कोच्चि में उनके दो कार्यक्रम निर्धारित हैं.

सुर्खियों में बने रहने की नेताओं की लालसा पर राहुल गांधी ने कसा तंज

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली के अपने राजनीतिक विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में नेतृत्व सभी लाउडस्पीकर और कैमरों को अपनी दिशा में मोड़ना पसंद करते हैं, लेकिन वह माइक का मुंह जनता की ओर मोड़ना पसंद करते हैं. यहां प्रसिद्ध लेखक टी पद्मनाभन को केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) द्वारा पहला प्रियदर्शिनी साहित्य पुरस्कार प्रदान किए जाने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि नेता बड़े मजेदार किस्म के लोग होते हैं, और लाउडस्पीकर हमेशा उनके सामने रहता है.

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राहुल गांधी ने कहा, यह (लाउडस्पीकर) भीड़ की तरफ नहीं होता क्योंकि हम खुद को बोलते हुए सुनना पसंद करते हैं. हर बार जब मैं वहां जाता हूं, तो मैं लाउडस्पीकर को दूसरी तरफ मोड़ देता हूं. मुझे लगता है, आज के भारत में, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि लाउडस्पीकर का मुंह दूसरी ओर किया जाए. अगर आप दिल्ली में अपने नेतृत्व को देखें, तो सभी लाउडस्पीकर और कैमरे उन्हीं की दिशा में लगे होते हैं. उन्होंने कहा कि निस्संदेह, पद्मनाभन जैसे लेखकों और उनके (राहुल गांधी) जैसे राजनीतिक नेताओं के बीच एक बड़ा अंतर है. कांग्रेस नेता ने कहा कि नेताओं की तुलना में पद्मनाभन के लिए सच बोलना बहुत आसान है. यह कुछ ऐसा है जो उन्होंने बिना किसी अपवाद के पूरे जीवन किया है. वायनाड से सांसद राहुल ने नेताओं से लेखकों की तरह बनने की आकांक्षा रखने का भी आग्रह किया, जो अपने मन में आने वाले हर सच को बोल देते हैं. हालांकि, गांधी ने स्वीकार किया कि यह बहुत ‘कठिन काम’ है.

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