तीनों रथों की सजावट पूरी
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने घोषणा की कि तीनों रथों (भगवान बलभद्र के ‘तालध्वज’, देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ और भगवान जगन्नाथ के ‘नंदीघोष’) का निर्माण और सजावट पूरी हो गई है. उन्होंने कहा कि देवताओं से ‘आज्ञामाला’ (अनुमति का संकेत देने वाली माला) मिलने के बाद इन रथों को 12वीं सदी के इस मंदिर के ‘सिंहद्वार’ तक ले जाया गया.
लाखों श्रद्धालु रथ खींचते हुए देखेंगे
मंदिर के सामने ‘ग्रैंड रोड’ पर कड़ी सुरक्षा के बीच तीनों रथ खड़े हैं. गुरुवार को देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु रथ खींचने खींचते हुए देखेंगे.
आयोजन को सफल बनाने के लिए किये गये हैं सभी इंतजाम
एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढी ने पत्रकारों को बताया कि महाप्रभु (भगवान जगन्नाथ) की कृपा से प्रशासन गुरुवार को सालाना रथ यात्रा आयोजित करने के लिए पूरी तरह तैयार है. इस तैयारी में ओडिशा पुलिस के अलावा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल जैसे विभिन्न सरकारी विभाग भी शामिल हैं. इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी इंतजाम कर लिये गये हैं.
समुद्र तट पर 500 ‘लाइफगार्ड’ तैनात
एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (कानून-व्यवस्था) संजय कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और त्वरित कार्यबल (आरएएफ) के कमांडो, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और सीमा सुरक्षाबल (बीएसएफ) के जवानों समेत केंद्रीय सशस्त्र बलों की 15 कंपनियां (लगभग 1,500 जवान) और 13,000 पुलिसकर्मी पहले ही तैनात किए जा चुके हैं. समुद्र तट पर 500 ‘लाइफगार्ड’ भी तैनात किए गए हैं.
शाम चार बजे तीनों देवताओं के रथों को खींचने की प्रक्रिया शुरू होगी
मंदिर के एक अधिकारी ने बताया कि सभी रस्में होने के बाद ‘छेरा पहंदा’ (गजपति महाराजा द्वारा रास्ते की सफाई) की पारंपरिक रस्म और पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के दर्शन के बाद शाम चार बजे तीनों देवताओं के रथों को खींचने की प्रक्रिया शुरू होगी. उन्होंने कहा कि करीब एक लाख लोग पहले ही पुरी पहुंच चुके हैं.
भारी बारिश को देखते हुए किये गये हैं खास इंतजाम
इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग के भारी बारिश और आंधी-तूफान के पूर्वानुमान को देखते हुए, ग्रैंड रोड से बारिश का पानी निकालने के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं.
