जंतर मंतर पर जुटने वाली भीड़ के फंडिंग सोर्स और आयोजकों की अब पुलिस करेगी बारीकी से जांच

दिल्ली पुलिस अब जंतर मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों के फंडिंग सोर्स और आयोजकों की गहन जांच शुरू कर रही है. इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य विरोध प्रदर्शनों की असलियत सामने लाना है.यह पड़ताल प्रदर्शनकारियों को जुटाने के तरीकों और उनके वास्तविक मकसद पर भी केंद्रित होगी.

दिल्ली का जंतर मंतर, जो लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों का गवाह रहा है, अब एक नई तरह की जांच के दायरे में आ गया है. दिल्ली पुलिस ने अब उन सभी प्रदर्शनों और आयोजनों की बारीकी से पड़ताल शुरू कर दी है, जिनमें बड़ी संख्या में लोग जंतर मंतर पर इकट्ठा होते हैं. इस जांच का मुख्य मकसद इन प्रदर्शनों के पीछे के फंडिंग सोर्स और आयोजकों की पहचान करना है. पुलिस का मानना है कि इस तरह की जांच से विरोध प्रदर्शनों की असलियत सामने आएगी और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सकेगी.

क्यों हो रही है ये खास जांच?

हाल के दिनों में जंतर मंतर और आसपास के इलाकों में कई ऐसे प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें लोगों की भीड़ बड़ी संख्या में जुटी. इन प्रदर्शनों के पीछे कौन लोग हैं, वे इस आयोजन को कैसे फंड कर रहे हैं, और उनका मकसद क्या है, यह सवाल पुलिस के लिए अहम हो गया है. खासकर उन प्रदर्शनों को लेकर चिंता जताई जा रही है, जिनके आयोजकों की पहचान स्पष्ट नहीं होती या जिनके पीछे विदेशी फंडिंग का शक होता है.

पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, इस तरह की जांच का दायरा सिर्फ फंडिंग तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें यह भी देखा जाएगा कि प्रदर्शनकारियों को जुटाने के लिए किस तरह के तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. क्या यह सब स्वेच्छा से हो रहा है या इसके पीछे कोई दबाव या प्रलोभन है.

फंडिंग सोर्स की पड़ताल

पुलिस का मुख्य जोर अब इन प्रदर्शनों के पैसों के स्रोत का पता लगाने पर है. इसके लिए कई तरह के तरीके अपनाए जा रहे हैं:

  • बैंक खातों की जांच: जिन लोगों या संस्थाओं पर प्रदर्शनों के आयोजन का शक है, उनके बैंक खातों की पड़ताल की जा सकती है. इसमें पैसों के लेनदेन का तरीका, रकम और स्रोत की जानकारी जुटाई जाएगी.
  • ऑनलाइन डोनेशन की निगरानी: आजकल ऑनलाइन माध्यमों से चंदा इकट्ठा करना काफी आसान हो गया है. पुलिस अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य ऑनलाइन माध्यमों पर चल रहे ऐसे डोनेशन कैम्पेन पर भी नजर रखेगी.
  • संस्थाओं का वेरिफिकेशन: कई बार प्रदर्शनों के पीछे एनजीओ (NGOs) या अन्य संस्थाओं का हाथ होता है. पुलिस ऐसी संस्थाओं के पंजीकरण, उनके पिछले कामों और उनके वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है.
  • विदेशी फंडिंग पर पैनी नजर: अगर किसी प्रदर्शन में विदेशी फंडिंग का जरा भी शक होता है, तो पुलिस विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के तहत इसकी गहन जांच करेगी.

आयोजकों की पहचान और मकसद

फंडिंग सोर्स के अलावा, पुलिस प्रदर्शनों के आयोजकों को लेकर भी सतर्क है.

  • पहचान छुपाने वालों पर शिकंजा: कई बार ऐसे लोग भी प्रदर्शनों का आयोजन करते हैं जो अपनी पहचान छुपाकर रखते हैं. पुलिस अब ऐसे गुमनाम आयोजकों का पता लगाने की कोशिश करेगी.
  • मकसद का खुलासा: यह भी जांचा जाएगा कि प्रदर्शनों का असली मकसद क्या है. क्या वे किसी जायज मुद्दे को उठा रहे हैं या फिर उनका इरादा माहौल खराब करना या किसी खास एजेंडे को आगे बढ़ाना है.
  • कानूनी पहलू की जांच: पुलिस यह भी देखेगी कि क्या प्रदर्शनकारियों ने सभी जरूरी कानूनी अनुमतियां ली थीं या नहीं. बिना अनुमति के बड़े आयोजन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी.

पहले भी हुई हैं ऐसी जांचें

यह पहली बार नहीं है जब जंतर मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों की जांच इस तरह से की जा रही है. अतीत में भी, खासकर जब कोई बड़ा आंदोलन या विरोध प्रदर्शन हुआ हो, तो सरकार और पुलिस की तरफ से फंडिंग और आयोजकों के बारे में सवाल उठाए गए हैं. लेकिन इस बार की जांच को कहीं ज़्यादा गहरी और व्यापक बताया जा रहा है.

आम जनता पर क्या होगा असर?

  • इस जांच का सीधा असर उन आम नागरिकों पर पड़ेगा जो जंतर मंतर पर जाकर अपनी बात रखना चाहते हैं. पुलिस की सख्ती के चलते, हो सकता है कि छोटे-मोटे आयोजनों में लोगों की भागीदारी कम हो जाए. हालांकि, पुलिस का कहना है कि उनका मकसद किसी भी जायज प्रदर्शन को रोकना नहीं है, बल्कि गैर-कानूनी और संदिग्ध गतिविधियों पर अंकुश लगाना है.
  • इस नई जांच से यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में जंतर मंतर पर होने वाले प्रदर्शन ज़्यादा पारदर्शी होंगे और उनके पीछे का सच लोगों के सामने आ सकेगा. पुलिस की यह पहल विरोध प्रदर्शनों के माहौल में एक नया अध्याय जोड़ती है, जिसकी निगरानी अब और कड़ी हो जाएगी.

ये भी पढ़ें: कर्नाटक के यादगीर में शिक्षकों का RSS पथ संचलन में हिस्सा लेना: निलंबन और कानूनी कार्रवाई, जानिए पूरा मामला


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >