गांधीनगर में एंबुलेंस को रास्ता देकर पीएम नरेंद्र मोदी के काफिले ने जीता लोगों का दिल, वीडियो वायरल

प्रधानमंत्री के काफिले को रोके जाने के वीडियो में यह साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस प्रकार पीएम मोदी के काफिले की दो एसयूवी कार धीरे-धीरे बायें होकर धीमी हो जाती है और एंबुलेंस गुजर जाता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले को आज अहमदाबाद से गांधीनगर जाते हुए एक एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए कुछ देर के लिए रोक दिया गया. प्रधानमंत्री मोदी के गुजरात दौरे का आज दूसरा दिन है.

एंबुलेंस को रास्ता देने का वीडियो भाजपा ने किया शेयर

प्रधानमंत्री के काफिले को रोके जाने का वीडियो गुजरात भाजपा की ओर से शेयर किया गया था. बाद में एएनआई न्यूज एजेंसी ने भी इस वीडियो को ट्‌वीट किया. इस वीडियो में यह साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस प्रकार एक एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए पीएम मोदी के काफिले की दो एसयूवी कार धीरे-धीरे बायें होकर एंबुलेंस को रास्ता देती है.


अहमदाबाद से गांधीनगर जा रहे थे पीएम मोदी

यह घटना तब घटी जब पीएम मोदी अहमदाबाद में अपनी रैली को समाप्त कर गांधीनगर स्थित राजभवन की ओर जा रहे थे. गुजरात भाजपा की ओर से जारी बयान में भी यह बताया गया कि जब प्रधानमंत्री गांधीनगर की ओर जा रहे थे उसी वक्त यह घटना घटी.

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को पीएम मोदी ने किया रवाना

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे का आज दूसरा दिन है. उन्होंने आज गांधीनगर-मुंबई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को रवाना किया. प्रधानमंत्री मोदी ने यहां थलतेज और वस्त्राल के बीच अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन किया और इसमें सफर भी किया. प्रधानमंत्री ने मेट्रो ट्रेन के पूर्वी-पश्चिमी गलियारे के कालूपुर स्टेशन पर परियोजना का उद्घाटन किया.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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