PM Modi Indonesia Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6-8 जुलाई तक इंडोनेशिया के दौरे पर हैं. आज उनकी यात्रा का अंतिम दिन है. इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए हैं और संबंधों को मजबूत बनाने के लिए कई घोषणाएं भी हुई हैं. अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी प्रसिद्ध प्रबांनन मंदिर भी गए.
भारत-इंडोनेशिया संबंधों में नया अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा केवल एक औपचारिक विदेश दौरा नहीं थी, बल्कि यह भारत और इंडोनेशिया के बीच विकसित हो रही व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली यात्रा साबित हुई. वर्ष 2018 में दोनों देशों के संबंधों को Comprehensive Strategic Partnership का दर्जा मिलने के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी. यह यात्रा जनवरी 2025 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो की मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति का भी सम्मानपूर्ण प्रत्युत्तर थी.
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्यों महत्वपूर्ण है इंडोनेशिया?
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा द्वीपीय देश है और मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) के निकट स्थित है. यह जलमार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है. भारत के लिए ऊर्जा, व्यापार और पूर्वी एशिया तक समुद्री संपर्क का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. इसी कारण भारत की एक्ट ईस्ट नीति, इंडो-पैसिफिक विजन और सागर (SAGAR) जैसी समुद्री रणनीतियों में इंडोनेशिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. दोनों देश समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के समर्थक हैं.
रक्षा सहयोग को मिला नया आयाम
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष रक्षा सहयोग रहा. भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल से जुड़ी साझेदारी लगातार आगे बढ़ रही है. इंडोनेशिया दक्षिण चीन सागर और विशेषकर उत्तर नातूना सागर में बढ़ती चीनी गतिविधियों को लेकर चिंतित है. ऐसे समय में भारत विश्वसनीय रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है. रक्षा सहयोग केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है. इसमें संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, समुद्री निगरानी, प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और रक्षा उद्योग में साझेदारी भी शामिल है. इससे हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और विश्वसनीयता दोनों मजबूत होती हैं.
व्यापार और महत्वपूर्ण खनिजों पर बढ़ता सहयोग
भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 23 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच चुका है, लेकिन इसकी संभावनाएँ इससे कहीं अधिक हैं. दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, निवेश, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया. विशेष रूप से निकेल (Nickel) जैसे महत्वपूर्ण खनिज भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद आवश्यक हैं. इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरियों के निर्माण में निकेल की बड़ी भूमिका है. इंडोनेशिया दुनिया के सबसे बड़े निकेल उत्पादकों में शामिल है, जबकि भारत अपनी ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना चाहता है. इसलिए दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग भविष्य की आर्थिक साझेदारी का प्रमुख आधार बन सकता है.
साझा संस्कृति भी बनी रणनीतिक ताकत
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर का भी दौरा किया. यह केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि दोनों देशों की हजारों वर्ष पुरानी सभ्यतागत निकटता का प्रतीक था. रामायण, संस्कृत परंपरा, बौद्ध और हिंदू विरासत तथा ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंध भारत और इंडोनेशिया के बीच विश्वास का मजबूत आधार हैं. जब सांस्कृतिक संबंधों को आधुनिक रणनीतिक सहयोग से जोड़ा जाता है, तो दोनों देशों के रिश्ते और अधिक स्थायी बनते हैं.
आसियान और वैश्विक दक्षिण के लिए क्या मायने?
इंडोनेशिया आसियान (ASEAN) का सबसे प्रभावशाली सदस्य है. भारत और इंडोनेशिया की मजबूत साझेदारी आसियान के साथ भारत के संबंधों को भी नई मजबूती देती है. साथ ही, दोनों देश वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को मजबूत करने, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पक्षधर हैं. इस दृष्टि से यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे हिन्द-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक स्थिरता और शक्ति संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
विशेषज्ञ की राय
करीब 10 वर्षों के अनुभव वाले भू-राजनीतिक विश्लेषक डॉ महीप का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-इंडोनेशिया संबंधों में "घोषणाओं से आगे बढ़कर वास्तविक रणनीतिक साझेदारी" की शुरुआत का संकेत देती है. उनके अनुसार, रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा, मलक्का जलडमरूमध्य में सहयोग और साझा सभ्यतागत विरासत—ये सभी मिलकर भारत और इंडोनेशिया को हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में स्वाभाविक और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार बनाते हैं. उनका कहना है कि यदि दोनों देश इन समझौतों को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं, तो यह साझेदारी न केवल दोनों देशों की सुरक्षा और आर्थिक हितों को मजबूत करेगी, बल्कि पूरे हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
नई ऊंचाइयों तक जाएगा भारत-इंडोनेशिया संबंध
निष्कर्षप्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया यात्रा ने स्पष्ट किया है कि भारत अब केवल "लुक ईस्ट" नहीं बल्कि सक्रिय रूप से "एक्ट ईस्ट" की दिशा में आगे बढ़ रहा है. रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और सांस्कृतिक संबंधों का यह व्यापक सहयोग आने वाले वर्षों में भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है. हिन्द-प्रशांत की बदलती भू-राजनीति में यह साझेदारी भारत की रणनीतिक क्षमता और वैश्विक भूमिका को और अधिक मजबूत करने वाली साबित हो सकती है.
