PM Modi Gift : प्रधानमंत्री मोदी ने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति को विवेक देबरॉय द्वारा किए गए महाभारत के 10 खंडों वाले अंग्रेजी अनुवाद की प्रति भेंट की. यह अनुवाद महाभारत की मूल कथा के साथ उसके दार्शनिक विचारों, वंशावली, संवाद और सहायक कहानियों को भी बिना काट-छांट के प्रस्तुत करता है.
महाभारत को भारत की साहित्यिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. पांडवों और कौरवों की कथा के माध्यम से यह धर्म, कर्तव्य, न्याय, नैतिकता, निष्ठा और शासन जैसे विषयों को सामने रखता है. भारतीय साहित्य, रंगमंच, प्रदर्शन कला और दृश्य कला पर भी इसका व्यापक प्रभाव रहा है.
महाभारत और किर्गिस्तान के प्रसिद्ध महाकाव्य 'मानस' के बीच भी सांस्कृतिक समानता बताई जाती है. दोनों महाकाव्य पीढ़ियों तक कहानियों, मूल्यों और सामूहिक स्मृतियों को संरक्षित करने की परंपरा को दर्शाते हैं.
मोदी ने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति को लद्दाखी 'त्सुग-दुल' कंबल भी भेंट किया
मोदी ने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति को लद्दाखी 'त्सुग-दुल' कंबल भी भेंट किया. यह लद्दाख का पारंपरिक ऊनी वस्त्र है, जो अपने चटख रंगों और ज्यामितीय व फूलों वाले डिजाइनों के लिए जाना जाता है. स्थानीय ऊन से तैयार किया जाने वाला यह कंबल गर्माहट और मजबूती के साथ लद्दाख की पारंपरिक कारीगरी और खानाबदोश जीवनशैली की झलक भी पेश करता है.
किर्गिस्तान के प्रधानमंत्री को डोकरा कलाकृति
किर्गिस्तान के प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री मोदी ने 'पारंपरिक संगीतकारों की जोड़ी' थीम वाली डोकरा कलाकृति भेंट की. यह कलाकृति भारत की प्राचीन धातु-कास्टिंग परंपरा और लोक कला को दर्शाती है. इसमें दो संगीतकारों को पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाते हुए दिखाया गया है.
डोकरा कला में 'लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग' तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. हर कलाकृति को हाथ से तैयार किया जाता है.
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को शत-तंत्री वीणा और कांगड़ा चाय
प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को चंदन की लकड़ी से बनी 'शत-तंत्री वीणा' भेंट की. इसे आम तौर पर संतूर के नाम से जाना जाता है. यह वाद्ययंत्र भारत की समृद्ध संगीत परंपरा और चंदन पर की जाने वाली बारीक नक्काशी का खूबसूरत संगम है.
कई तारों वाला यह समलंब आकार का वाद्ययंत्र जम्मू-कश्मीर की संगीत परंपरा से जुड़ा है. इसका स्वरूप उज्बेकिस्तान के पारंपरिक वाद्ययंत्र 'चंग' से काफी मिलता-जुलता है. इसे दोनों देशों की साझा संगीत और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा जा सकता है.
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री ने लकड़ी के नक्काशीदार बक्से में प्रीमियम कांगड़ा चाय भी भेंट की. इसमें कांगड़ा फर्स्ट फ्लश ब्लैक टी और कांगड़ा ग्रीन टी के दो डिब्बे शामिल थे.
हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में चाय की खेती 19वीं सदी से होती आ रही है. कांगड़ा फर्स्ट फ्लश ब्लैक टी अपने हल्के स्वाद, फूलों जैसी खुशबू और हल्की मिठास के लिए जानी जाती है, जबकि कांगड़ा ग्रीन टी अपने ताजगी भरे और सौम्य स्वाद के लिए पहचानी जाती है.
उज्बेक राष्ट्रपति की बेटी को सिल्वर ब्रोच
प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति की बेटी को फाइन सिल्वर ब्रोच भी उपहार में दिया. इस ब्रोच में सजावटी टोकरी में फूलों का गुलदस्ता बनाया गया है. इसमें बारीक जालीदार काम के साथ फूल-पत्तियों की नक्काशी की गई है. हरे कैबोचॉन और साफ पत्थरों से इसे आकर्षक रूप दिया गया है.
फूलों के डिजाइन भारतीय कला परंपरा में सुंदरता, जीवन, समृद्धि और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक माने जाते हैं. यह ब्रोच भारत की पारंपरिक धातु-कला और सजावटी शिल्प की झलक पेश करता है.
उज्बेक राष्ट्रपति को जावोखिर सिंदारोव की ओरिजिनल स्कोरशीट
प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को शतरंज ग्रैंडमास्टर जावोखिर सिंदारोव की हाथ से लिखी ओरिजिनल स्कोरशीट भी भेंट की. यह स्कोरशीट 2025 में गोवा में हुए FIDE वर्ल्ड कप फाइनल से जुड़ी है.
सिंदारोव ने फाइनल में चीन के वेई यी को हराकर खिताब अपने नाम किया था. यह उपलब्धि उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है. लेदरेट कवर में सुरक्षित यह स्कोरशीट फाइनल में चली गई बाजियों की यादगार के तौर पर पेश की गई.
उज्बेक राष्ट्रपति की पत्नी को बनारसी सिल्क स्टोल और मार्बल इनले बॉक्स
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति की पत्नी को प्रधानमंत्री मोदी ने बनारसी सिल्क स्टोल के साथ मार्बल इनले का डिब्बा भेंट किया. यह उपहार भारत की दो प्रमुख शिल्प परंपराओं, आगरा की मार्बल इनले कला और वाराणसी की बनारसी सिल्क बुनाई का संगम है.
सफेद संगमरमर के डिब्बे पर रंगीन पत्थरों से फूलों के बारीक डिजाइन बनाए गए हैं. इसके साथ दिया गया बनारसी सिल्क स्टोल गहरे नीले रंग का है और उस पर पैस्ले डिजाइन के साथ जरी का काम किया गया है.
मार्बल इनले कला का संबंध खास तौर पर आगरा से है. संगमरमर पर रंगीन पत्थरों से की जाने वाली यह बारीक कारीगरी भारत की पारंपरिक शिल्प विरासत का हिस्सा है. उज्बेकिस्तान की वास्तु परंपरा में भी संगमरमर का महत्वपूर्ण स्थान रहा है, जिससे यह उपहार दोनों देशों की कलात्मक परंपराओं के बीच समानता को दर्शाता है.
उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री को मार्बल इनले सजावटी प्लेट
प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री को मार्बल इनले से बनी सजावटी प्लेट भी भेंट की. सफेद संगमरमर पर नीले, हरे और लाल रंगों के पत्थरों से फूलों और पत्तियों के बारीक डिजाइन तैयार किए गए हैं.
यह कारीगरी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा से जुड़ी है और इसे पीढ़ियों से चली आ रही भारतीय पत्थर नक्काशी की परंपरा का उदाहरण माना जाता है. प्लेट पर बने फूलों के डिजाइन सुंदरता, नई शुरुआत और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक हैं.
इन उपहारों के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने SCO देशों के नेताओं के साथ भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला, संगीत, साहित्य और हस्तशिल्प को साझा किया. इन उपहारों में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की कला और संस्कृति की झलक देखने को मिलती है.
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