PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम दौरे के दौरान राज्य के विकास और चाय बागान श्रमिकों के कल्याण से जुड़ी कई बड़ी बातें कही हैं. पीएम ने कहा कि भाजपा सरकार उन लोगों को प्राथमिकता देती है जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गए हैं.
‘अंतिम नहीं, सीमावर्ती गांवों को देश का पहला गांव मानते हैं’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ का जिक्र करते हुए कहा कि पहले की कांग्रेस सरकारों का नजरिया सीमावर्ती गांवों को लेकर अलग था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारें इन इलाकों को देश के आखिरी गांव मानती थीं, लेकिन उनकी सरकार इन सीमावर्ती गांवों को ‘देश का पहला गांव’ मानती है. इसी सोच के साथ उन्होंने असम के कछार जिले से वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अगले चरण की शुरुआत की.
चाय बागान वर्कर्स को मिला हक
असम के चाय बागानों में काम करने वाले लोगों के लिए पीएम ने इसे एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. प्रधानमंत्री ने कहा कि असम सरकार ने चाय बागानों से जुड़े हजारों परिवारों को जमीन का मालिकाना हक देकर एक ऐतिहासिक काम किया है.
इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि पहले चरण में 28,241 परिवारों को जमीन के पट्टे (लैंड पट्टे) दिए गए हैं. कार्यक्रम के दौरान पीएम ने प्रतीकात्मक रूप से तीन परिवारों को ये पट्टे सौंपे.
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‘यह मेरा कर्ज चुकाने जैसा है’
चाय बागान श्रमिकों के प्रति अपना भावनात्मक लगाव जाहिर करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह कदम उनके लिए ‘ऐतिहासिक अन्याय’ को खत्म करने जैसा है. उन्होंने अपने चाय बेचने वाले अतीत को याद करते हुए कहा कि चाय बागान के श्रमिकों को जमीन का मालिकाना हक देकर मैं अपना कर्ज चुका रहा हूं. आपके द्वारा तोड़ी गई चाय की पत्तियां ही गुजरात तक पहुंचीं और उसी चाय को बेचकर मैं आज इस पद तक पहुंचा हूं. मुझे आपके आशीर्वाद मिले हैं.
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