lockdown 3.0 : नाई की दुकान और सैलून को खोलने की मिली अनुमति, ई-कॉमर्स कंपनियों को भी छूट, लेकिन ये हैं शर्तें

केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने शनिवार को स्पष्ट किया कि चार मई से शुरू हो रहे लॉकडाउन के तीसरे चरण में हरित और ऑरेंज जोन में नाई की दुकान एवं सैलून (Permission to open barber shop and saloon in lockdown) को खोलने की अनुमति होगी. e-commerce companies also get exemption

नयी दिल्ली : देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्र‍मण को देखते हुए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन को 17 मई तक आगे बढ़ा दिया है. हालांकि सरकार ने लोगों को लॉकडाउन में कुछ शर्तों के साथ छूट भी दी है, लेकिन इसे लिए भी गृह मंत्रालय ने कोरोना वायरस के संक्रमित इलाकों को जोन में बांट दिया है और उसी के अनुरूप में लॉकडाउन में छूट दी गयी हैं.

लॉकडाउन के दौरान लोगों को सबसे अधिक बाल और दाढ़ी को लेकर हो रही थी. क्‍योंकि इस दौरान नाई और सैलून की दुकानें पूरी तरह ये बंद थीं. नाई और सैलून की दुकानें बंद रहने से लोगों को काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन गृह मंत्रालय ने अब अपने नये संशोधन में नाई और सैलून की दुकानों को खोलने की मंजूरी दे दी है. लेकिन यह सभी जोन के लिए नहीं है.

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केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने शनिवार को स्पष्ट किया कि चार मई से शुरू हो रहे लॉकडाउन के तीसरे चरण में हरित और ऑरेंज जोन में नाई की दुकान एवं सैलून को खोलने की अनुमति होगी.

इसके अलावा ई-कॉमर्स कंपनियां इन क्षेत्रों में गैर-अनिवार्य सामानों की बिक्री भी कर सकेंगी. गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को लॉकडाउन दो हफ्ते के लिए बढ़ाते हुए इसे 17 मई तक कर दिया था. इसने हरित और ऑरेंज जोन में कई प्रतिबंधों में ढील दी है.

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गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि हरित और औरेंज जोन में ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा गैर जरूरी सामानों की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं होगा. उन्होंने कहा कि इन इलाकों में नाई की दुकानें और सैलून भी खोलने की अनुमति होगी. ये छूट चार मई से प्रभावी होंगी जब लॉकडाउन का तीसरा चरण शुरू होगा.

गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस के अब तक 37336 मामले सामने आ चुके हैं और अब तक 1218 लोगों की मौत भी हो चुकी है. हालांकि इस बीच राहत की बात है कि 9951 लोग कोरोना को हराकर अपने घर लौट चुके हैं.

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Published by: Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials) अरबिंद शैक्षणिक रूप से भी पत्रकारिता और क्षेत्रीय विषयों के गहरे जानकार हैं:

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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