बिरला ने खींची लकीर, नोटिस का निपटारा पहले, फिर सदन में वापसी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्ताव नोटिस पर बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक प्रस्ताव का निपटारा नहीं हो जाता सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे.

न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया- लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने नैतिक आधार पर फैसला किया है कि नोटिस का निपटारा होने तक वह सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे.

बिरला ने लोकसभा महासचिव को दिया निर्देश

बिरला ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया है कि वह विपक्ष के नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई करें.

विपक्ष ने बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने के लिए दिया नोटिस

विपक्ष ने बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंपा और बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने तथा अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने विपक्ष का नोटिस मिलने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि इस पर विचार किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

नोटिस में 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी का नाम नहीं

लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को बिरला के खिलाफ नोटिस सौंपा. नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के 118 से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं. हालांकि राहुल गांधी ने नोटिस में साइन नहीं किया. तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने भी इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.

संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत नोटिस दी गई

कांग्रेस नेता गोगोई ने कहा कि लोकसभा महासचिव को संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस सौंपा गया है. नोटिस में कहा गया है, हम भारत के संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के प्रावधानों के अंतर्गत लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव लाने का नोटिस देते हैं, क्योंकि जिस तरह से वह लोकसभा की कार्यवाही का संचालन कर रहे हैं, वह खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण है. कई अवसरों पर विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने ही नहीं दिया गया, जबकि यह संसद में उनका मूल लोकतांत्रिक अधिकार है. विपक्ष ने नोटिस में कहा, बीते दो फरवरी को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते समय अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया. यह कोई अकेली घटना नहीं है. करीब-करीब हमेशा ही ऐसा होता है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता.

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Published by: ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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