Nithari Case : जेल से रिहाई, चाय की दुकान और फिर सुसाइड... सुरेंद्र कोली के आखिरी दिनों की पूरी कहानी

निठारी कांड : 2006 के निठारी सीरियल किलिंग मामले के बरी आरोपी सुरेंद्र कोली ने बुधवार को आत्महत्या कर ली. हरिद्वार में उसका शव फंदे से लटकता मिला, जहां वह चाय की दुकान चला रहा था. पिछले साल नवंबर महीने में उसे सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया था.

Nithari Case : देश को हिलाकर रख देने वाले 2006 के निठारी सीरियल किलिंग मामले में पिछले साल सुप्रीम कोर्ट से बरी हुए सुरेंद्र कोली (उम्र करीब 50 वर्ष) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है.

शुक्रवार को उत्तराखंड के हरिद्वार में उसका शव फंदे से लटकता मिला. हरिद्वार पुलिस के मुताबिक, जेल से बाहर आने के बाद कोली यहीं एक चाय की दुकान चलाकर अपना गुजारा कर रहा था और इसी दुकान में उसका शव पाया गया.

कब हुई थी रिहाई?

सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2025 को उसके खिलाफ चल रहे 13वें और आखिरी मामले में भी क्यूरेटिव पिटीशन स्वीकार करते हुए उसे बरी कर दिया था और तुरंत रिहाई का आदेश दिया था. इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही 12 नवंबर को वह करीब 19 साल बाद जेल से बाहर आया था.

निठारी कांड : नरक बने D-5 बंगले से मासूमों के कंकाल मिलने तक का खौफ

यह खौफनाक मामला दिसंबर 2006 में तब सामने आया था, जब नोएडा के सेक्टर-31 में स्थित मोनिंदर सिंह पंढेर की डी-5 कोठी के पीछे नाले से बच्चों की खोपड़ियां, हड्डियां, जूते-चप्पल और कपड़े बरामद हुए थे. इस मामले में कम से कम 19 बच्चों और महिलाओं की हत्या की पुष्टि हुई थी. उस वक्त इस बंगले को मीडिया और आम लोगों ने 'हाउस ऑफ हॉरर्स' (खौफ का घर) नाम दे दिया था. इसके बाद पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.

फांसी के फंदे के बिल्कुल करीब पहुंच चुका था कोली

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, जिसने कोली पर अपहरण, रेप, हत्या और सबूत मिटाने के गंभीर आरोप लगाए. 2009 से 2017 के बीच निचली अदालतों ने कोली को 12 मामलों में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी. साल 2014 में तो हालात ऐसे बन गए थे कि उसकी दया याचिका खारिज हो चुकी थी और उसे मेरठ जेल में फांसी पर लटकाने की पूरी तैयारी हो गई थी. लेकिन ऐन वक्त पर आधी रात को सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगी और तत्कालीन चीफ जस्टिस ने फांसी पर रोक लगाकर उसे जीवनदान दे दिया था.

सुप्रीम कोर्ट से बरी और देश की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेली

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कोली के खिलाफ चल रहे 13वें और आखिरी मामले में भी उसे बरी कर दिया था. इससे पहले वह बाकी 12 केसों में भी छूट चुका था. देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा था कि कोली के खिलाफ सिर्फ परिस्थितिजन्य सबूत थे, जिनका कोई ठोस फॉरेंसिक आधार नहीं था. अदालत ने जांच में गंभीर खामियां पाईं और यह भी माना कि बच्चों के अंग व्यापार (ऑर्गन ट्रेड) से जुड़े अहम सुरागों की ठीक से जांच ही नहीं की गई थी.

19 मासूमों का कातिल कौन? मौत के साथ दफन हुआ राज

सुप्रीम कोर्ट से पंढेर और कोली दोनों के पूरी तरह बरी होने के बाद, देश को हिला देने वाला निठारी कांड भारत के इतिहास का सबसे बड़ा अनसुलझा मर्डर केस बनकर रह गया. जेल से छूटने के बाद कोली गुमनामी की जिंदगी जीने हरिद्वार चला गया था और वहां चाय बेचकर गुजारा कर रहा था. लेकिन अब उसकी खुदकुशी के बाद यह बड़ा सवाल हमेशा के लिए अधूरा रह गया कि आखिर उन 19 मासूम बच्चों की जान किसने और क्यों ली थी.

सुरेंद्र कोली के आखिरी दिनों की कहानी

हरिद्वार में पहचान छिपाकर चलाता था चाय का की दुकान

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से बरी होकर जेल से निकलने के बाद कोली अपने पैतृक राज्य उत्तराखंड चला गया था. वह हरिद्वार में सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने किराए पर चाय का एक छोटा सा खोखा (कियोस्क) चला रहा था.

गुजार रहा था गुमनामी की जिंदगी

करीब 19 साल जेल में काटने के बाद उसने अपनी पुरानी पहचान से दूर एक साधारण चाय बेचने वाले के रूप में नई शुरुआत करने की कोशिश की थी. आसपास के लोगों को उसकी पुरानी पृष्ठभूमि और निठारी कांड से जुड़े होने की कोई भनक नहीं थी.

पारिवारिक दूरी और अकेलापन

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, जेल से बाहर आने के बाद भी वह गंभीर आर्थिक तंगी, अकेलेपन और पारिवारिक तनाव से जूझ रहा था. परिवार से उसका बहुत ज्यादा जुड़ाव नहीं रह गया था और सबसे दूर-दूर ही रहता था.

कोई सुसाइड नोट नहीं

पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. पुलिस का मानना है कि लंबे समय तक जेल में रहने के बाद समाज में दोबारा खुद को न ढाल पाना और पारिवारिक क्लेश इस आत्मघाती कदम की वजह हो सकती है.

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By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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