कार के डिवाइडर से टकराते ही लगी आग, जिंदा जले प्राइवेट हाॅस्पिटल के न्यूरोसर्जन

तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में रविवार सुबह एक भयंकर सड़क हादसे में एक डॉक्टर ( न्यूरोसर्जन) जिंदा जल गए जिससे उनकी मौत हो गई. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार डॉक्टर खम्मम जिले के रहने वाले थे और उनका नाम जगदीश बाबू था.

रविवार की सुबह करीब 7:15 बजे जगदीश बाबू अपनी कार NH-365BB पर सवार होकर खम्मम से हैदराबाद जा रहे थे. पिल्ललामर्री के पास उनकी कार सड़क के डिवाइडर से टकरा गई. टक्कर बहुत तेज थी इस वजह से कार में आग लग गई और देखते ही देखते पूरा वाहन आग की लपटों में घिर गया. डॉक्टर कार के अंदर फंस गए और बुरी तरह झुलसने से उनकी मौत हो गई.

परिवार के पास जा रहे थे जगदीश बाबू

मामले की जांच में जुटे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हादसा सुबह करीब 7:15 बजे हुआ. उस वक्त डॉ जगदीश बाबू खम्मम से हैदराबाद जा रहे थे, जहां उनका परिवार रहता है. इसी दौरान पिल्ललामर्री के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर सड़क के डिवाइडर से टकरा गई. आशंका जताई जा रही है कि शायद डॉक्टर जगदीश बाबू को नींद आ गई, जिसकी वजह से गाड़ी पर उनका कंट्रोल नहीं रहा और वह डिवाइडर से टकरा गई.


डिवाइडर से टकराते ही कार में लगी आग

पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया कि डिवाइडर से टकराने के तुरंत बाद कार में आग लग गई. आग इतनी भयंकर थी कि कुछ ही मिनटो में पूरी गाड़ी धू-धू कर जल गई. डॉ जगदीश बाबू कार के अंदर फंसे रह गए, उन्हें कार से निकलने का मौका नहीं मिला. उनका शरीर इतनी बुरी तरह जल चुका था कि शव की पहचान करने में दिक्कत हो रही थी.

निजी मेडिकल कॉलेज में न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख थे जगदीश बाबू

डॉ जगदीश बाबू खम्मम के एक निजी मेडिकल कॉलेज में न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख थे. दुर्घटना की जानकारी मिलने के बाद सूर्यापेट से डॉक्टरों की एक टीम घटनास्थल पर पहुंचीं. शव को पोस्टमार्टम के लिए सूर्यापेट सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है. परिवार को हादसे की सूचना दे दी गई है. अभी तक उनके परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है.


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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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