बाढ़ ने चीन की सीमा से लगे इलाकों से लेकर चितवन तक के क्षेत्रों को प्रभावित किया है. सरकार राहत कार्य कर रही है. कई शव बरामद किए गए हैं. नेपाल को भारी नुकसान हुआ है. मैंने सुना है कि सैकड़ों पर्यटक लापता हैं. यह वास्तव में एक दर्दनाक घटना थी. हमें उम्मीद है कि हमारे पड़ोसी देश नेपाल की मदद करेंगे. नेपाल का एक स्थानीय निवासी
Nepal Flood: यह पीड़ा सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि आज पूरे देश का दर्द बन गया है. बाढ़ ने चीन सीमा से लगे इलाकों से लेकर चितवन तक ऐसा मंजर छोड़ा है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. कई शव बरामद हो चुके हैं, सैकड़ों पर्यटक अब भी लापता बताए जा रहे हैं और तबाही के निशान दूर-दूर तक फैले हैं. हर परिवार किसी अपने की खबर का इंतजार कर रहा है. बारिश की हर बूंद के साथ लोगों के जेहन में उस विनाशकारी फ्लैश फ्लड की भयावह तस्वीर फिर उभर रही है.
579 पर्यटक समेत 800 से ज्यादा लोग लापता
नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद लापता लोगों की संख्या बढ़कर 826 हो गई है. राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक इनमें करीब 580 पर्यटक भी शामिल हैं. बाढ़ में अब तक 165 लोगों की मौत हुई है. NDRRMA के अनुसार लापता लोगों में 579 पर्यटक, 85 सुरक्षाकर्मी और 162 लोग विभिन्न हाइड्रोपावर परियोजनाओं और सीमा शुल्क कार्यालयों से जुड़े कर्मचारी हैं.
अब तक 165 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई लोग, जिनमें स्थानीय और पर्यटक दोनों शामिल हैं, अभी भी लापता हैं. 28 देशों के 476 लोगों के लापता होने की सूचना है. खोज और बचाव अभियान जारी रहने के कारण इन आंकड़ों की पुष्टि की जा रही है- नेपाल दूतावास
बुधवार को आई थी भीषण बाढ़
यह बाढ़ बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास के इलाकों में आई थी. इसके बाद से सैकड़ों लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है और तलाश जारी है. नेपाल के रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ में कई लोगों की मौत की खबर नेपाली अखबारों में छपी है. इस त्रासदी की भयावहता से पूरे हिमालयी देश में व्यापक शोक और चिंता का माहौल है.
इस समय हमारी तत्काल प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की जान बचाना और खोज एवं बचाव, निकासी एवं राहत कार्यों में सहयोग करना है. बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान को देखते हुए, सरकार जमीनी स्थिति और उभरती जरूरतों का आकलन करना जारी रखेगी और जहां आवश्यक होगा, स्थापित आधिकारिक चैनलों के माध्यम से सहायता के लिए विशिष्ट आवश्यकताओं को सूचित करेगी- नेपाल दूतावास
कैसे शुरू हुई आपदा?
यह आपदा तब शुरू हुई जब रसुवागढ़ी बॉर्डर पॉइंट से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में ग्लेशियर या बर्फ की चट्टान के ढहने के बाद लेंडे खोला में मलबे से भरी एक विशाल बाढ़ आ गई. तिब्बत की ओर से भोटे कोशी नदी में उफान मारते हुए, तेज बहाव ने रसुवागढ़ी, तिमुरे और स्याफरु बेसी से होते हुए त्रिशुली नदी में प्रवेश किया, जिससे रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन जिलों के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मची.
इस आपदा में 35 मोटर योग्य पुल
- 45 सस्पेंशन पुल और 40 किलोमीटर पक्की सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं
- व्यापक नुकसान का आकलन अभी भी जारी है.
रसुवागढ़ी से चितवन तक मची तबाही
भोटे कोशी का तेज पानी रसुवागढ़ी, तिमुरे और स्याफ्रुबेसी से गुजरते हुए त्रिशुली नदी में पहुंचा. इसके बाद रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन जिलों के नदी किनारे वाले क्षेत्रों में भारी तबाही मची. घरों, सड़कों, पुलों, पनबिजली संयंत्रों और दूसरे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है.
हेलीकॉप्टर और जमीनी टीमें चला रहीं रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक खोज, बचाव और राहत अभियान को तेज कर दिया गया है. नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें सैन्य और निजी हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रही हैं. तिमुरे और स्याफ्रुबेसी में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए जमीनी टीमें रातभर काम करती रहीं.
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घायलों के इलाज के लिए मेडिकल टीमें तैनात
बाढ़ में घायल लोगों के इलाज के लिए जिला अस्पतालों से लेकर काठमांडू के बड़े चिकित्सा संस्थानों तक मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है. नेपाल सेना की बैरकों में अस्थायी आश्रय, भोजन, साफ पानी और दवाओं की भी व्यवस्था की गई है.
भारत ने नेपाल को भेजी 10 टन मानवीय सहायता
बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई है. नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़का राज पौडेल को 10 टन मानवीय सहायता सामग्री सौंपी. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी बताया कि भारत की HADR और चिकित्सा सहायता काठमांडू पहुंच गई है और राहत कार्यों में सहयोग जारी है.
PM मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से की बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से बात कर बाढ़ में हुई जानमाल की हानि पर शोक व्यक्त किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत इस मुश्किल समय में नेपाल के लोगों के साथ खड़ा है और हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है. दोनों देशों की टीमें राहत और बचाव अभियान में मिलकर काम कर रही हैं.
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