International Conference: नेपाल त्रासदी के संकेत को समझते हुए, प्रकृति के अनुकूल विकास मॉडल अपनाना होगा

नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद हिमालयी क्षेत्र में विकास मॉडल और जलवायु परिवर्तन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की महानिदेशक सुनीता नारायण ने चेताया है कि प्रकृति के संकेतों को अनसुना करना भारी पड़ सकता है. समय रहते पर्यावरण संरक्षण और संतुलित विकास को प्राथमिकता देना आवश्यक है.

नेपाल में हाल में आयी प्राकृतिक आपदा के बाद हिमालयी क्षेत्र में विकास के मौजूदा मॉडल और जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार बढ़ रही प्राकृतिक आपदाओं पर सवाल उठ रहे हैं. समय के साथ हिमालयी क्षेत्र में अचानक बादल फटने, भूस्खलन और ग्लेशियर टूटने के कारण आने वाली बाढ़ के मामले अधिक हो रहे हैं. ऐसे में अब सभी को इस बाबत गंभीरता से विचार करना होगा कि इस आपदा से कैसे निपटा जाए. बुधवार को आयोजित 8वें इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन सस्टेनेबिलिटी एजुकेशन को संबोधित करते हुए सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि प्रकृति लगातार संकेत दे रही है कि पर्यावरण से छेड़छाड़ नहीं हो. लेकिन इसे सुनने को कोई तैयार नहीं है. नेपाल में आयी त्रासदी से यह समझ लेना चाहिए कि जलवायु परिवर्तन का खतरा कितना गंभीर हो गया है. ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति से छेड़छाड़ तत्काल बंद होनी चाहिए. दुनिया के अधिकांश देश अत्यधिक गर्मी, बेमौसम बेहताशा बारिश, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदा का सामना कर रही है. प्रकृति लगातार संदेश दे रही है कि विकास के मौजूदा मॉडल पर विचार किया जाना चाहिए. अगर समय रहते प्रकृति के संदेश पर अमल नहीं किया गया तो आने वाले समय में नेपाल जैसी आपदा कई जगहों पर देखने को मिलेगी और इसका स्वरूप और भयावह हो सकता है. 

हिमालय में संतुलित विकास समय की मांग 

सुनीता नारायण ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में हो रहे विकास कार्य और जलविद्युत परियोजनाओं की उपयोगिता पर विचार करना होगा. हिमालयी क्षेत्र में विकास के अंधाधुंध निर्माण और नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को रोकने का आने वाले समय में गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. हिमालय के क्षेत्र काफी संवेदनशील होते है और यहां विकास स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार संतुलित होना चाहिए. विकास होना चाहिए लेकिन पर्यावरण की अनदेखी कर नहीं. भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम की घटना सामान्य होती जा रही है. गर्मी ऐसी पड़ रही है कि लोगों का सड़क पर निकलना मुश्किल होता जा रहा है. कहीं बहुत अधिक बारिश, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदा के कारण लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है. इसी तरह शहरों में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और यह बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन रही है. प्रदूषण से निपटने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना होगा और जीवन जीने के तरीके में बदलाव लाना होगा. प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर चलना होगा और प्रकृति के अनुकूल विकास को बढ़ावा देने के तरीकों पर विचार करना होगा. 


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Vinay Tiwari

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >