यह पहला मौका होगा जब नवगठित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट NEET UG पेपर लीक से जुड़े मामले में सुनवाई करेगी.
आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगी कोर्ट
फास्ट ट्रैक कोर्ट इस मामले में गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगी. ये दोनों आरोपी सीबीआई (CBI) द्वारा NEET UG पेपर लीक साजिश के तहत गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों में शामिल हैं. जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों का संबंध उस नेटवर्क से है जिसने कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक किया और उसे आगे विभिन्न अभ्यर्थियों तक पहुंचाया.
फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन और उद्देश्य
देशभर में छात्रों के प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोपियों को सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का ऐलान किया था. उन्होंने 23 जुलाई को एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी थी. उन्होंने लिखा था, "देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा. इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें. विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की शृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है. युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा."
संसद में विधेयक पेश करेगी मोदी सरकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 23 जुलाई को घोषणा की थी कि संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान होंगे. इस घोषणा के कुछ घंटे बाद ही मंत्रिमंडल ने मसौदे को मंजूरी दी.
10 साल की सजा और 10 करोड़ का जुर्माना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 जुलाई को प्रश्नपत्र लीक के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान सुनिश्चित करने के लिए एक विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी. इसमें 10 साल तक की जेल की सजा और अधिकतम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. मौजूदा कानून में व्यक्तिगत रूप से शामिल लोगों के लिए तीन से पांच साल तक की कैद का प्रावधान है.
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