2 दिनों में 700 से भी ज्यादा म्यांमार नागरिकों ने मणिपुर में किया प्रवेश, असम रायफल्स से सवाल- कैसे हुए दाखिल

म्यांमा के 301 बच्चों सहित कम से कम 718 नागरिकों ने पिछले सप्ताह मणिपुर में अवैध रूप से प्रवेश किया. इससे पहले 23 जुलाई को म्यांमा के कुल 230 नागरिक न्यू लाजांग में, 89 न्यू समताल में, 143 यांग्नोमफाई गांव में, 175 यांग्नोमफाई सॉ मिल में, 30 ऐवोमजंग में और 38 भोंससे में अवैध रूप से दाखिल हुए.

मणिपुर सरकार ने कहा है कि म्यांमा के 301 बच्चों सहित कम से कम 718 नागरिकों ने पिछले सप्ताह पूर्वोत्तर के राज्य में अवैध रूप से प्रवेश किया. गृह विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, भारत-म्यांमा सीमा पर तैनात सुरक्षा बल असम राइफल्स ने 22 से 23 जुलाई को चंदेल जिले में म्यांमा के नागरिकों के अवैध रूप से प्रवेश करने की सूचना दी थी. मुख्य सचिव विनीत जोशी ने असम राइफल्स से जानना चाहा कि म्यांमा के नागरिकों को बिना यात्रा दस्तावेज के भारत में प्रवेश की अनुमति कैसे दी गई. उन्होंने असम राइफल्स को इन अवैध प्रवासियों को तुरंत देश से भेजने का निर्देश दिया. जोशी ने एक बयान में कहा, मुख्यालय 28 सेक्टर असम राइफल्स से रिपोर्ट मिली है कि 718 शरणार्थी भारत-म्यांमा सीमा को पार कर न्यू लाजांग के आम क्षेत्र में घुस आए हैं. म्यांमा के इन 718 नागरिकों में 209 पुरुष, 208 महिलाएं और 301 बच्चे शामिल हैं.

इससे पहले, म्यांमा के 13 नागरिकों ने 22 जुलाई को लाजांग इलाके में प्रवेश किया था. बयान में कहा गया है कि 23 जुलाई को म्यांमा के कुल 230 नागरिक न्यू लाजांग में, 89 न्यू समताल में, 143 यांग्नोमफाई गांव में, 175 यांग्नोमफाई सॉ मिल में, 30 ऐवोमजंग में और 38 भोंससे में अवैध रूप से दाखिल हुए. केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक, राज्य सरकार ने सीमा की सुरक्षा करने वाले असम राइफल्स को यात्रा दस्तावेज के बिना मणिपुर में म्यांमा के नागरिकों के प्रवेश को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश दिया था. बयान के अनुसार, राज्य सरकार अवैध प्रवेश के मुद्दे को बहुत गंभीरता से लेती है, क्योंकि कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए इसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हो सकते हैं. सरकार ने चंदेल जिले के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को अवैध प्रवासियों की वापसी की निगरानी करने और म्यांमा के सभी नागरिकों का बायोमेट्रिक डेटा और तस्वीरें रखने की सलाह दी है. मणिपुर म्यांमा के साथ 398 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है. मणिपुर के कुकी समुदाय के साथ जातीय संबंध साझा करने वाले चिन समुदाय के लोग म्यांमा में रहते हैं.

फर्जी वीडियो मामले में आरोपियों को पकड़ने का प्रयास तेज
मणिपुर में हिंसा शांत नहीं हो रहा है. इसी कड़ी में एक फर्जी हत्या के वीडियो को लेकर पुलिस आरोपी की धर-पकड़ में जुट गई है. दरअसल, पड़ोसी देश म्यांमा में एक महिला की हत्या को मणिपुर की घटना के रूप से दिखाने संबंधी वीडियो प्रसारित करने के आरोपियों को आईपी एड्रेस की मदद से पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं. मणिपुर पुलिस ने यह जानकारी दी. साइबर अपराध पुलिस थाने में इस फर्जी खबर के संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है. इस वीडियो में म्यांमा में हथियारबंद लोग एक महिला की हत्या करते दिख रहे हैं.

पुलिस ने दर्ज किया मामला
इस मामले में पुलिस ने ट्वीट किया कि यह क्लिप दंगा भड़काने के लिए प्रसारित की जा रही है और फर्जी खबर फैलाने वालों को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं. पुलिस के मुताबिक, फर्जी खबर फैलाने पर प्राथमिकी दर्ज की गई है. उसने बताया कि इस वीडियो में म्यांमा में हुई हत्या को मणिपुर की घटना के तौर पर दिखाया गया है. पुलिस ने ट्वीट किया कि सार्वजनिक शांति भंग करने, दंगा भड़काने और राज्य में कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या पैदा करने के इरादे से झूठी खबरें फैलाने के आरोपियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

बता दें, फर्जी खबर संबंधी यह वीडियो ऐसे समय में प्रसारित हुआ है, जब कांगपोकपी जिले में चार मई को दो महिलाओं को भीड़ द्वारा निर्वस्त्र घुमाने का वीडियो 19 मई को सामने आया था और देशभर में इस घटना की कड़ी निंदा हो रही है. मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के दौरान हिंसा भड़कने के बाद से राज्य में अब तक 160 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं तथा कई अन्य घायल हुए हैं. राज्य में मेइती समुदाय की आबादी करीब 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं. वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और वे अधिकतर पर्वतीय जिलों में रहते हैं.

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नागरिक संस्थाएं मणिपुर हिंसा के खिलाफ करेंगी मिजोरम में रैली
नागरिक संस्थाएं जातीय हिंसा से जूझ रहे मणिपुर में जो समुदाय के लोगों के प्रति एकजुटता व्यक्त करने के लिए मंगलवार को मिजोरम में प्रदर्शन करेंगी. मिजोरम में मिजो समुदाय के लोगों का मणिपुर के कुकी, बांग्लादेश के चटगांव पहाड़ी इलाकों के कुकी-चिन और म्यांमा के चिन समुदाय के लोगों के साथ जातीय संबंध है. इन्हें सामूहिक रूप से ‘जो’ कहा जाता है. सेंट्रल यंग मिजो एसोसिएशन (सीवाईएमए) और मिजो जिरलाई पावल (एमजेडपी) सहित पांच प्रमुख नागरिक संस्थाओं का समूह विरोध रैलियां निकालेगा. मुख्यमंत्री जोरमथंगा ने घोषणा की है कि रैलियों के समर्थन में उनकी मिजो नेशनल पार्टी (एमएनएफ) का कार्यालय मंगलवार को बंद रहेगा. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से रैलियों में हिस्सा लेने को कहा. एमएनएफ के अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेपीएम) समेत अन्य विपक्षी दल भी रैलियों के समर्थन में अपने पार्टी कार्यालय बंद रखेंगे.

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