Monsoon: अगले 48 से 72 घंटे में मानसून दे सकता है दस्तक, IMD का आया नया अपडेट

Monsoon: देश के कई राज्यों में अब भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है. भारत मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले दो से तीन दिनों में केरल पहुंच सकता है. इसके बाद यह देश के अन्य हिस्सों में भी अगले 15 से 20 दिनों में पहुंच जाएगा.

Monsoon: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान जाहिर किया है कि अगले 48 से 72 घंटे के अंदर देश में मानसून की दस्तक हो सकती है. मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून के अगले दो से तीन दिनों में केरल पहुंचने की संभावना है. आमतौर पर देश में मानसून का आगमन एक जून के आसपास माना जाता है. आईएमडी के अनुसार- अगले कुछ दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के कुछ और हिस्सों, लक्षद्वीप, केरल तथा तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं.

बंगाल की खाड़ी के क्षेत्रों में भी बढ़ेगा प्रभाव

मौसम विभाग ने बताया कि इसी अवधि के दौरान मानसून दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों के साथ-साथ दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के बचे हुए क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकता है.

पहले अनुमान से पहुंचने में हुई देरी

आईएमडी ने पहले केरल में मानसून के आगमन की संभावित तारीख 26 मई बताई थी. हालांकि, मानसून की प्रगति में अनुमान के मुताबिक गति नहीं रहने के कारण इसके आगमन में देरी हुई. विभाग ने 29 मई को अपने लेटेस्ट अपडेट में कहा था कि मानसून अगले सप्ताह केरल पहुंच सकता है.

इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान

पिछले सप्ताह जारी पूर्वानुमान में आईएमडी ने कहा कि साल 2026 के मानसून सीजन में देश भर में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है. विभाग के अनुसार, इस साल देश में दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 90 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान है.

क्या है दीर्घकालिक औसत एलपीए?

एलपीए किसी क्षेत्र में एक निश्चित अवधि, जैसे एक महीने या पूरे मानसून मौसम के दौरान हुई औसत बारिश को दर्शाता है. इसकी गणना आमतौर पर 30 से 50 सालों के वर्षा आंकड़ों के आधार पर की जाती है. साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के अनुसार पूरे भारत के लिए मौसमी बारिश का एलपीए 87 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है. आईएमडी के मानकों के अनुसार, यदि किसी साल मानसून के दौरान होने वाली बारिश एलपीए के 90 प्रतिशत से कम रहती है, तो उसे कम वर्षा वाला मानसून माना जाता है.

अल नीनो बन सकता है प्रमुख कारण

मौसम विभाग ने बताया कि इस साल सामान्य से कम बारिश की आशंका के पीछे अल नीनो बड़ा कारण है. अल नीनो का प्रभाव आमतौर पर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है, जिससे बारिश में कमी आने की संभावना बढ़ जाती है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pritish sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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