पूर्वोत्तर के उग्रवादी सरकार के आगे डालेंगे हथियार, असम और आतंकवादी समूहों के बीच हुआ करार

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इस समझौते के बाद 1170 उग्रवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हो जाएंगे. साथ ही वे सरकार को 300 से अधिक स्वचालित हथियार सौंपेंगे. असम में शांति की दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा.

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि असम सरकार और 8 जनजातीय समूहों के प्रतिनिधियों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हुए.इस मौके पर  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि एक लंबी प्रक्रिया के बाद नॉर्थ ईस्ट में शांति और समृद्धि का वातावरण स्थापित हो रहा है. वहीं, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इस समझौते के बाद 1170 उग्रवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हो जाएंगे. साथ ही वे सरकार को 300 से अधिक स्वचालित हथियार सौंपेंगे.  असम में शांति की दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा.  

असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम के आदिवासी जनसंख्या की मांगों के चलते 8 उग्रवादी संगठनों का जन्म हो चुका था. ये उग्रवादी संगठन 2012 में सरकार के साथ बातचीत शुरू की.  2016 में सरकार और उग्रवादी संगठनों के बीच युद्ध विराम समझौता हुआ. उन्होंने कहा कि यह असम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. पीएम मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर को देश की अष्टलक्ष्मी बनाने का काम चल रहा है.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने असम के कुछ हिस्सों में स्थायी शांति लाने के लिए आठ आदिवासी आतंकवादी संगठनों के साथ आज यानी गुरुवार को एक समझौते किया. इन आठ समूहों में ऑल आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी, आदिवासी कोबरा मिलिटेंट ऑफ असम, बिरसा कमांडो फोर्स, संथाल टाइगर फोर्स और आदिवासी पीपुल्स आर्मी शामिल हैं.

 शांति और सद्भाव के नये युग की शुरुआत: असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने इस मौके पर कहा उन्हें विश्वास है कि समझौता होने से असम में शांति और सद्भाव के एक नए युग की शुरुआत होगी. परेश बरुआ के नेतृत्व वाले उल्फा के कट्टरपंथी गुट और कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन को छोड़कर, राज्य में सक्रिय अन्य सभी विद्रोही समूहों ने सरकार के साथ शांति समझौता कर लिया है.
भाषा इनपुट के साथ

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Author: Pritish Sahay

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