सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत में अमेरिकी कानून नहीं चल सकता है. मेटा को भारतीय कानूनों के अनुसार चलना पड़ेगा.
मेटा पर क्यों सख्त हुई सरकार? क्या है पूरा मामला
यह पूरा विवाद हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फेसबुक पोस्ट को करीब पांच घंटे तक हटाए जाने के बाद शुरू हुआ. हालांकि, बाद में मेटा ने इसे एआई (AI) फिल्टर की तकनीकी गलती बताते हुए पोस्ट बहाल कर दी थी. सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को हुई पहली बैठक में मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की ओर से सरकार से इसके लिए औपचारिक माफी मांगी गई. मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल केपलन के नेतृत्व में एक दल ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की है.
'सेफ हार्बर' सुरक्षा छीनने की चेतावनी
बैठक में सरकार ने आईटी कानून की धारा 79 का हवाला देते हुए मेटा को सख्त चेतावनी दी. सरकार ने साफ कहा कि अगर कंपनी अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाती है और गैर-कानूनी कंटेंट पर रोक नहीं लगाती, तो उसे भारतीय कानून के तहत मिलने वाली कानूनी छूट (Safe Harbour Protection) खत्म की जा सकती है.
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मेटा ने मानी अपनी नाकामी
पूछताछ के दौरान जब सरकार ने अवैध सामग्री को रोकने के उपायों पर सवाल उठाया, तो मेटा ने माना कि उसकी मौजूदा प्रणालियां पूरी तरह सक्षम नहीं हैं और वह सभी अवैध सामग्री को रोक पाने में असमर्थ रही है. हालांकि, मेटा ने आश्वासन दिया है कि वह डीपफेक, फेक खातों और बाल यौन शोषण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है.
3-4 दिन और चलेगी जांच
सरकारी सूत्रों के हवाले से पीटीआई ने बताया, मेटा के अधिकारियों से पूछताछ का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है. अगले 3 से 4 दिनों तक मेटा की तकनीकी टीम सरकार के साथ सरकारी अधिकारी बात करेंगे.
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