महबूबा मुफ्ती का आरोप- जम्मू-कश्मीर में मुसलमानों को उनकी संस्कृति और भाषा से दूर करने की साजिश कर रही है बीजेपी

Mehbooba Mufti : जम्मू-कश्मीर में मुसलमानों को उनकी संस्कृति और भाषा से दूर करने के लिए एजेंडे के तहत ऐसे संस्थानों को बंद किया जा रहा है, जो मुसलमानों को उनकी तहजीब की शिक्षा देते हैं. मीडिया से बात करते हुए पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने रविवार को यह टिप्पणी की है.

Mehbooba Mufti : जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि दोनों सरकारें मुसलमानों की संस्कृति और उनकी भाषा को समाप्त करने पर तुली है. महबूबा ने यह भी कहा कि सरकार बड़ी-बड़ी मशीनें लगाकर कामगारों से उनका रोजगार छिन रही है. सरकार रोजगार तो दे नहीं पा रही है, वहीं मशीनें लाकर वह लोगों को बेरोजगार कर रही है.

सिराजुल उलूम को बंद करना साजिश

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सिराजुल उलूम जैसे एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन, जो गरीब बच्चों को शिक्षा देते थे, उन्हें एजेंडे के तहत बंद कर दिया गया है. इस संस्थान से पढ़ने वाले बच्चे अक्सर इंजीनियर और डॉक्टर तैयार करते थे लेकिन उन्हें बंद कर दिया गया. महबूबा मुफ्ती ने कहा कि बीजेपी की सरकार मुसलमानों को उनकी संस्कृति और शिक्षाओं से दूर करना चाहती है. इसी एजेंडे के तहत उर्दू को भी राज्य से हटाने की साजिश की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू और कश्मीर में मुस्लिम कल्चरल और धार्मिक पहचान खतरे में है. पहले रेवन्यू डिपार्टमेंट में नौकरी के लिए उर्दू की जानकारी होना जरूरी था,लेकिन अब सिर्फ ग्रेजुएट होना जरूरी है.

पाकिस्तान की भाषा बोल रही हैं महबूबा मुफ्ती

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने अपने वीकली प्रेस ब्रीफिंग में हाल में यह कहा है कि भारत में मुसलमानों की पहचान उनकी संस्कृति और उनकी भाषा को नष्ट किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा था कि जामिया यूनिवर्सिटी में आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर कार्यक्रम हुए. यह इस विश्वविद्यालय के हिंदूकरण की कोशिश है. भारत में कश्मीरियों की पहचान को समाप्त करने की कोशिश भी हो रही है. अब पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने भी अंद्राबी के बयानों के अनुरूप ही टिप्पणी की है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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