Gujarat Election 2022: महेसाणा विधानसभा सीट से किसे मैदान में उतारेगी भाजपा ? जानें क्‍यों है यह खास सीट

Gujarat Election 2022: हार्दिक पटेल का नाम अपके कानों तक जरूर पहुंचा होगा. जी हां...उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ी थी और भाजपा का दामन थाम लिया था. यदि आपको याद हो तो महेसाणा से ही पाटीदार आरक्षण आंदोलन की शुरुआत करते हुए हार्दिक पटेल ने हुंकार भरी थी.

Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात में विधानसभा चुनाव के पहले राजनीतिक पारा गरम हो चला है. इस बार का चुनाव इसलिए और अहम होता नजर आ रहा है क्‍योंकि मैदान में आम आदमी पार्टी यानी ‘आप’ भी पूरे दमखम के साथ उतरने के लिए तैयार है. आप ने अपने तीन उम्मीदवारों की सूची तक जारी कर दी है जबकि कांग्रेस सितंबर के अंत में अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करना शुरू करेगी. गुजरात भाजपा का गढ़ है और पहले ऐसा प्रतीत हो रहा था कि पार्टी किसी रुकावट के चुनावी झंडे गाड़ लेगी लेकिन अब मुकाबला त्रिकोणिय होता दिख रहा है.

इन सबके बीच हम गुजरात के महेसाणा की चर्चा करते हैं जो भाजपा के लिए अहम सीट है. जी हां…जब भाजपा को पूरे देश में कहीं पर भी जनादेश नहीं था, तब पार्टी ने महेसाणा क्षेत्र पर जीत का परचम लहराया था. महेसाणा को भाजपा की राजनीतिक लेबोरेटरी की संज्ञा दी जाती है. यहा से भाजपा के दिग्गज नेता आते हैं. यहां तक की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का भी यहां से गहरा संबंध है.

हार्दिक पटेल की चर्चा

हार्दिक पटेल का नाम अपके कानों तक जरूर पहुंचा होगा. जी हां…उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ी थी और भाजपा का दामन थाम लिया था. यदि आपको याद हो तो महेसाणा से ही पाटीदार आरक्षण आंदोलन की शुरुआत करते हुए हार्दिक पटेल ने हुंकार भरी थी. इस बार महेसाणा की सीट पर भाजपा में मंथन चल रहा है. महेसाणा की बात करें तो ये वही सीट है जिसपर 1990 से भाजपा ने कब्जा जमा रखा है.

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महेसाणा क्‍यों है भाजपा के लिए अहम सीट

महेसाणा सीट की बात करें तो 58 साल पहले यहां पर 1962 में पहली बार विधानसभा चुनाव कराये गये थे. इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला उम्मीदवार शांताबेन पटेल ने जीत का परचम लहराया था. 1990 में महेसाणा विधानसभा सीट पर पाटीदार समाज के कारण भाजपा के खोडाभाई पटेल चुनाव जीते थे. वर्ष 2002 और 2007 में अनिल पटेल पर भाजपा ने भरोसा जताया था. पार्टी की उम्मीद पर वे खरे भी उतरे थे. अब बात 2012 और 2017 के चुनाव की करते हैं.

इन दोनों चुनाव में भाजपा से नितिन पटेल चुनावी मैदान में उतरे थे. पाटीदार आंदोलन से बदले हुए राजनीतिक और सामाजिक समीकरण के बीच भी उन्होंने भाजपा को निराश नहीं किया और जीत दर्ज की. अब इस विधानसभा में ये देखने वाली बात होगी कि नितिन पटेल को भाजपा फिर से चुनावी मैदान में उतारेगी या किसी और नये चेहरे को उम्मीदवार बनाती है.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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