Mahakumbh 2025: 15 दिन में कबाड़ी वाले ने की साल भर की कमाई, चायवालों पर भी पैसों की बरसात

Mahakumbh 2025: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 45 दिनों तक चले महाकुंभ मेला को हमेशा-हमेशा के लिए याद रखा जाएगा. कुंभ मेला ने कई गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति बदल दी. दिन-दिनभर मजदूरी कर चंद पैसे कमाने वाले मजदूरों की हजारों-लाखों रुपये की कमाई हुई.

Mahakumbh 2025: Mahakumbh 2025: 13 जनवरी से 26 फरवारी तक प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में 67 करोड़ लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई. महाकुंभ केवल धार्मिक आयोजन भर साबित नहीं हुआ, बल्कि गरीबों के लिए वरदान साबित हुआ. लोगों ने 45 दिनों के मेले में साल भर की कमाई कर ली. झारखंड के रहने वाले एक कबाड़ी का काम करने वाले शख्स ने बताया- महाकुंभ के दौरान उसने 15 दिनों तक अपनी ट्रॉली से लोगों को संगम घाट तक पहुंचाया. जिससे उसकी हजारो रुपये की कमाई हुई. उसने बताया कि उसे एक दिन में 2500 रुपये तक की कमाई हो रही थी. उसने 15 दिनों में इतने पैसे कमा लिए, जितना वो साल भर में कमाता था. शख्स ने बताया- उसके पास इतने पैसे जमा हो गए हैं कि वो अब नई ट्रॉली खरीद लेगा. महाकुंभ मेला से पहले अपनी ट्रॉली से कबाड़ खरीदने का काम करता था, लेकिन कुंभ ने उसकी जिंदगी बदल दी. अगर कुछ दिन पहले से वो ट्रॉली से सवारी ढोने का काम करता तो उसकी और अच्छी कमाई होती. ये कहानी केवल एक शख्स की नहीं है, बल्कि कुंभ में हजारों की संख्या में लोग ठेले और बाइक से श्रद्धालुओं को संगम घाट पहुंचाने का काम करते थे. जिससे उन्हें हजारों, लाखों की कमाई हुई.

चाय बेचने वालों की जमकर हुई कमाई

महाकुंभ 2025 की वजह से स्थानीय लोगों की भी अच्छी कमाई हुई. कुंभ मेला में केवल ट्रॉली मैन ही नहीं, बल्कि चायवाले, सड़क किनारे दुकान लगाने वाले, फूल-प्रसाद बेचने वालों की भी अच्छी कमाई हुई. ट्रॉली चलाने वाले शख्स ने कहा- कुंभ ने सिखाया की मेहनत और मौके का फायदा उठाकर अच्छी कमाई की जा सकती है.

नाविकों ने लाखों में की कमाई

महाकुंभ 2025 से नाविकों ने करोड़ों की कमाई की. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बताया था कि एक नाविक परिवार ने कुंभ में करोड़ों की कमाई की. केवल एक नाविक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि कई नाविकों ने कुंभ में लाखों रुपये की कमाई की.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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