Lok Sabha: लोकसभा अध्यक्ष को हटाने में कितना सफल होगा विपक्ष

लोकसभा में विपक्षी पार्टियों ने अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है. इस नोटिस पर कांग्रेस, डीएमके, सपा के सदस्यों के हस्ताक्षर हैं. हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने नोटिस से दूरी बना ली है. यह नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा के नियम 200 के तहत दिया गया है. नोटिस में कहा गया है कि लोकसभा अध्यक्ष सदन का संचालन पक्षपाती तरीके से कर रहे हैं.

Lok Sabha: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा कथित तौर पर न बोलने देने और 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन के कारण सदन की कार्यवाही बाधित है. विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष पर पक्षपात करने का आरोप लगा रहा है. इस बीच मंगलवार को लोकसभा में विपक्षी पार्टियों ने अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया. इस नोटिस पर कांग्रेस, डीएमके, सपा के सदस्यों के हस्ताक्षर हैं. हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने नोटिस से दूरी बना ली है. यह नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा के नियम 200 के तहत दिया गया है. नोटिस में कहा गया है कि लोकसभा अध्यक्ष सदन का संचालन पक्षपाती तरीके से कर रहे हैं.

अध्यक्ष विपक्ष के नेता को लोकसभा में बोलने नहीं दे रहे हैं और विपक्ष की महिला सांसदों के खिलाफ निराधार आरोप लगाने वाले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. नोटिस मिलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लोकसभा सचिवालय इस नोटिस की जांच करेगा और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा. उन्होंने नोटिस पर जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. गौर करने वाली बात है कि इससे पहले भी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ नोटिस आया है, लेकिन अभी तक किसी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है. 


क्या है हटाने की प्रक्रिया


लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ महाभियोग नहीं लगाया जा सकता है. महाभियोग संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ लाया जाता है और इसके लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव का पारित होना आवश्यक है. लोकसभा अध्यक्ष को सदन में प्रस्ताव लाकर सामान्य बहुमत से हटाने का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत आता है. इसके लिए विपक्ष को पहले नोटिस देना होता है और इसके लिए कम से कम 50 सदस्यों का हस्ताक्षर होना जरूरी है. फिर लोकसभा सचिवालय नोटिस की जांच करता है और नियमों के अनुसार सही होने पर नोटिस को स्वीकार करता है. नोटिस पर 14 दिनों के अंदर चर्चा होती है. नोटिस स्वीकार होने पर सदन में इस पर चर्चा होती है. चर्चा के दौरान अध्यक्ष कार्यवाही का संचालन नहीं कर सकते हैं.

इसके बदले डिप्टी स्पीकर या राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य सदन का संचालन करता है. चर्चा के बाद प्रस्ताव पर मतदान होता है और खास बात है कि प्रस्ताव को पारित कराने के लिए लोकसभा के कुल सदस्यों का आधा से अधिक यानी कम से कम 272 वोट होना जरूरी है. जबकि अविश्वास और अन्य प्रस्तावों पर मतदान के लिए सदन में उपस्थित सांसदों की संख्या के आधार पर निर्णय होता है. मौजूदा समय में एनडीए सरकार के पास स्पष्ट बहुमत है और इस प्रस्ताव का स्वीकार होना मुश्किल है. 

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Anjani Kumar Singh

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >