Lockdown: प्रदेश सरकार का बड़ा ऐलान, बिना मास्क पहने ना निकले बाहर; HMPV वायरस से हड़कंप

Lockdown: भारत ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV ) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अबतक कुल 7 केस सामने आ चुके हैं. बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट कर दिया गया है.

Lockdown: HMPV के संक्रमण को देखते हुए कर्नाटक में मास्क पहनने, सामाजिक दूरी बनाए रखना और हाथ साफ रखने की सलाह दे दी गई है. कर्नाटक में अबतक दो मामले सामने आए हैं. तमिलनाडु सरकार ने मंगलवार को कहा कि ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) कोई नया और खतरनाक संक्रमण नहीं है. ऐसे में इसको लेकर घबराने की जरूरत नहीं. राज्य में इससे संक्रमित मिले दो व्यक्ति ठीक हैं.’’

मास्क पहनने की दी गई सलाह

तमिलनाडु के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मा सुब्रमण्यन ने कहा- संक्रमण ने भारत और खासकर राज्य में कोई बड़ा प्रभाव नहीं डाला है. सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित लोग एचएमपीवी की जांच करवा सकते हैं, लेकिन इसके लिए कोई विशेष उपचार नहीं है. उन्होंने कहा कि मास्क पहनना, सामाजिक दूरी बनाए रखना और हाथ साफ रखने जैसे उपायों को अपनाने के लिए लोगों, खासकर लक्षण वालों को प्रेरित किया जा रहा है.

कब और कैसे फैलता है HMPV वायरस

आरएमएल अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ पिनाकी आर देबनाथ ने HMPV वायरस के बारे में बताया, “ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस कोई नया वायरस नहीं है, यह पुराना वायरस है. यह पहले भी था. सर्दी जैसे कुछ कारणों से यह अभी फैला है. सर्दी में ऐसा होता है. यह रेस्पिरेटरी आरएनए वायरस है, यह रेस्पिरेटरी सिस्टम को संक्रमित करता है. वायरल संक्रमण तब ज्यादा फैलता है जब रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है या उम्र के चरम पर होते हैं. 60-65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों या 5 साल से कम उम्र के लोगों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. अगर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, तो वायरस ज्यादा फैलता है.”

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क्या है लक्षण

इसके लक्षणों में श्वसन संक्रमण शामिल है – जैसे नाक बंद होना, नाक बहना, आंखें लाल होना और गले में खराश होना. अगर यह गंभीर है, तो निमोनिया जैसे लक्षण होंगे, जब सांस लेने में तकलीफ होगी. नहीं तो सर्दी-खांसी जैसे सामान्य लक्षण होंगे. इसका असर 2-7 दिन तक रहता है और इस अवधि में यह अपने आप ठीक हो जाता है.

HMPV वायरस से बचाव के उपाय

डॉ पिनाकी आर देबनाथ ने बताया, “इसके लिए कोई एंटी-वायरल दवा नहीं है. तो, हम इसे कैसे रोक सकते हैं – मास्क लगाकर अगर आप भीड़भाड़ वाली जगह पर जा रहे हैं, अगर वहां कोई संक्रमित व्यक्ति है तो उससे दूरी बनाए रखें और उससे हाथ न मिलाएं, अपने हाथ धोएं और खांसते/छींकते समय शिष्टाचार का पालन करें. इससे संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी. अगर किसी में लक्षण हैं, जैसे कि अगर किसी को बुखार है, तो आप उसे एंटीपायरेटिक दे सकते हैं… लेकिन आपको ध्यान रखना होगा कि अगर आपके लक्षण बिगड़ते हैं, तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.”

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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