किरेन रिजिजू ने कहा-राहुल गांधी को प्रशिक्षण की जरूरत, मेरे लिए यह बच्चों का खेल

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के साथ फिटनेस की तुलना पर मजेदार जवाब दिया है. उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश की तेज नदियों में तैरना उनके लिए बचपन का खेल है, जबकि राहुल गांधी को शायद इसके लिए ट्रेनिंग की जरूरत पड़े.

किरेन रिजिजू ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर अपनी एक तस्वीर के साथ लिखा है कि बहुत से लोग कह रहे हैं कि मैं भी राहुल गांधी जैसा कर रहा हूं. राहुल जी ऐसी एक्टिविटीज के लिए ट्रेनिंग ले सकते हैं लेकिन यह मेरी जिंदगी का नॉर्मल रूटीन है. मैं ट्रेनिंग नहीं लेता क्योंकि ये मेरे लिए बचपन से ही बच्चों का खेल है. मेरी जिंदगी एडवेंचर से भरी है.मैं यहां का खिलाड़ी हूं. दरअसल कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच फिटनेस को लेकर हल्की-फुल्की नोक-झोंक अकसर चलती रहती है और इसी कड़ी में बीजेपी नेता रिजिजू ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि अरुणाचल प्रदेश की तेज बहाव वाली नदियों में तैरने के लिए राहुल गांधी को प्रशिक्षण की जरूरत पड़ सकती है.


अरुणाचल प्रदेश की नदियां बहुत बड़ी और गहरी

किरेन रिजिजूने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया और लिखा कि मैं यहां का खिलाड़ी हूं.उन्होंने लिखा है कि अगर आपको तैरना नहीं आता है, तो कभी भी गहरे पानी में न जाएं. नदी में कई लोग डूब चुके हैं. अरुणाचल प्रदेश की नदियां बहुत बड़ी और गहरी हैं.रिजिजू ने बाद में एक और वीडियो पोस्ट किया, जिसमें बताया कि अरुणाचल की नदियों में तैरना, तरण-ताल या शांत पानी में तैरने से कैसे अलग है.

किरेन रिजिजू ने बताई तैरने की तकनीक

उन्होंने लिखा कि कुछ लोगों को लग सकता है कि अरुणाचल प्रदेश की तेज बहती नदियों में तैरना, तरण-ताल या यमुना जैसी नदियों में तैरने जैसा ही है. लेकिन ऐसी तेज बहाव वाली नदियों में हमारा सिर ऊपर होना चाहिए, नीचे नहीं; और शरीर ऊपर की ओर ज्यादा सीधा होना चाहिए, न कि वैसा सीधा जैसा हम तैराकी की प्रतियोगिताओं में रखते हैं. रिजिजू ने कुछ लोगों द्वारा उनकी तुलना राहुल गांधी से किये जाने के बाद अरुणाचल प्रदेश में अपने बचपन का जिक्र करते हुए जवाब दिया.

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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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