केरल से ही वामपंथी सत्ता का हुआ था सूर्योदय, वहीं से हुआ सूर्यास्त

Kerala Election Result: केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) की हार से वामपंथी सरकार की विदाई हो गयी. यही नहीं पांच दशक बाद पहली बार ऐसी स्थिति बनी जब देश के किसी राज्य में वाम दलों की सरकार नहीं है. वर्तमान लोकसभा में CPI(M) के पांच जबकि CPI (ML) लिबरेशन के दो सांसद हैं.

Kerala Election Result: जिस केरल से वाम दलों ने पहली बार 1957 में सत्ता का सूर्योदय देखा था, आज वहीं से उनका सूर्यास्त हो गया. 1957 में देश में गैर-कांग्रेसवाद को उस वक्त हवा मिली जब ईएमएस नंबूदिरीपाद की अगुवाई में पहली बार केरल में वामपंथी सरकार बनी. इसके बाद कम्युनिस्ट पार्टियों ने धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने पैर पसारे और पश्चिम बंगाल में तो 1977 से लगातार 34 साल तक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में रही, जहां आज वह एक विधानसभा सीट जीतने के लिए संघर्ष कर रही है.

1977 के बाद पहली बार देश के किसी राज्य में वाम दल की सरकार नहीं

1977 के बाद पहली बार ऐसा होगा कि जब देश के किसी राज्य में वाम दलों की सरकार नहीं है. 2016 से एलडीएफ द्वारा शासित केरल, आखिरी राज्य था जहां वाम दलों की सत्ता थी. इससे पहले पश्चिम बंगाल में 2011 और त्रिपुरा में 2018 में सत्ता से उसकी विदाई हुई.

स्वतंत्रता के बाद CPI संसद में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी थी

स्वतंत्रता के बाद के भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) संसद में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के रूप में उभरी. 1990 और 2000 के दशक के दौरान, वामपंथी दल लोकसभा में एक महत्वपूर्ण समूह बने रहे, जो अक्सर गठबंधन राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे. वामपंथी दलों की 1990 के दशक में लोकसभा में संयुक्त ताकत आम तौर पर 40 से 50 सदस्यों के बीच थी.

वाम दलों का प्रभाव 2004 में चरम पर था

वाम दलों का प्रभाव 2004 में चरम पर था, जब उन्होंने 61 सीटें जीती थीं और कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार को बाहर से समर्थन दिया. 1996 में संयुक्त मोर्चा सरकार बनने पर CPI(M) से प्रधानमंत्री बनने की स्थिति पैदा हुई थी. पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु को प्रधानमंत्री पद की पेशकश की गई थी, तो CPI(M) के केरल के धड़े ने इसके खिलाफ रुख अपनाया और बसु ने इस पद को अस्वीकार कर दिया था.

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By Arbindkumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

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करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

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शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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