रॉयल ब्रुनेई और अमेरिकी सेना का जंगल युद्ध कौशल: 'पहलवान वॉरियर' अभ्यास में दिखी खास तैयारी

रॉयल ब्रुनेई सशस्त्र बल और अमेरिकी सेना ने 'पहलवान वॉरियर' नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास में हिस्सा लिया. घने जंगलों में आयोजित इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य जंगल युद्ध में दोनों देशों के सैनिकों के बीच तालमेल और परिचालन तैयारी को मजबूत करना था.

New Delhi: जंगल के घने और मुश्किल हालात में लड़ना किसी भी सेना के लिए बड़ी चुनौती होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए, रॉयल ब्रुनेई सशस्त्र बल (RBAF) और अमेरिकी सेना (US Army) ने हाल ही में 'पहलवान वॉरियर' (Pahlawan Warrior) नाम के एक बड़े सैन्य अभ्यास में हिस्सा लिया. इस अभ्यास का मुख्य मकसद जंगल युद्ध (Jungle Warfare) में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बिठाना और उनकी ऑपरेशनल तैयारी को और मजबूत बनाना था.

यह अभ्यास ब्रुनेई के बेहद घने जंगलों में आयोजित किया गया, जो इस तरह के प्रशिक्षण के लिए एक आदर्श जगह है. अभ्यास के दौरान, दोनों देशों के सैनिकों ने मिलकर कई तरह की चुनौतियों का सामना किया और अपने कौशल का प्रदर्शन किया. इसमें छिपकर दुश्मन पर हमला करना, मुश्किल इलाकों में आगे बढ़ना, और टीम वर्क के साथ मिशन को पूरा करना जैसी चीजें शामिल थीं.

जंगल युद्ध के खास हुनर: अभ्यास में क्या-क्या हुआ?

'पहलवान वॉरियर' अभ्यास सिर्फ एक रूटीन ट्रेनिंग नहीं थी, बल्कि यह दोनों देशों के सैनिकों के लिए एक-दूसरे की युद्ध रणनीतियों और तकनीकों को सीखने का एक बड़ा मौका था. ब्रुनेई के जंगल अपनी खास भौगोलिक बनावट और घने पेड़ों के लिए जाने जाते हैं. ऐसे माहौल में दुश्मन को ढूंढ निकालना और उन पर काबू पाना आसान नहीं होता.

अभ्यास के दौरान, सैनिकों को कई तरह की ट्रेनिंग दी गई, जिनमें शामिल हैं:

  • घात लगाना (Ambush Tactics): सैनिकों को सिखाया गया कि कैसे घने जंगलों का फायदा उठाकर दुश्मन को अचानक घेरा जा सकता है. इसमें छिपने की जगह ढूंढना और सही वक्त पर हमला करना शामिल था.
  • निशाना लगाना (Marksmanship): अलग-अलग दूरियों और मुश्किल हालातों में सटीक निशाना लगाने का अभ्यास कराया गया.
  • जंगल में रास्ता खोजना (Navigation): कंपास और मैप का इस्तेमाल करके या फिर प्राकृतिक संकेतों के आधार पर घने जंगल में रास्ता खोजना.
  • मेडिकल सपोर्ट (Medical Support): घायल सैनिकों को फर्स्ट एड देना और उन्हें सुरक्षित जगह पर ले जाना.
  • टीम वर्क (Teamwork): यह सबसे अहम हिस्सा था. सैनिकों को मिलकर काम करने, एक-दूसरे की मदद करने और एक यूनिट के तौर पर आगे बढ़ने का प्रशिक्षण दिया गया.

अमेरिकी सेना की भूमिका और ब्रुनेई के जंगल का महत्व

अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे उन्नत और प्रशिक्षित सेनाओं में से एक है. उनके पास जंगल युद्ध के लिए खास तरह के उपकरण और ट्रेनिंग मॉड्यूल होते हैं. 'पहलवान वॉरियर' अभ्यास में अमेरिकी सैनिकों ने अपने अनुभव और तकनीकें रॉयल ब्रुनेई सशस्त्र बल के जवानों के साथ साझा कीं.

वहीं, ब्रुनेई के जंगल भी इस अभ्यास के लिए बेहद खास थे. यह इलाके बेहद घने, नमी वाले और कई तरह के वन्यजीवों से भरे होते हैं. इन हालातों में ट्रेनिंग लेने से सैनिकों की शारीरिक और मानसिक क्षमताएं बढ़ती हैं. यह अभ्यास दिखाता है कि दोनों देश किसी भी तरह की बाहरी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं.

भविष्य की तैयारी और आपसी सहयोग

  • 'पहलवान वॉरियर' जैसे अभ्यास सिर्फ वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए नहीं होते, बल्कि ये भविष्य की सुरक्षा के लिए भी एक मजबूत नींव रखते हैं. जब दो देशों की सेनाएं मिलकर अभ्यास करती हैं, तो उनके बीच आपसी समझ और विश्वास बढ़ता है. यह सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता (Regional Stability) के लिए भी बहुत जरूरी है.
  • इस तरह के संयुक्त अभ्यास (Joint Exercises) यह भी दिखाते हैं कि कैसे अलग-अलग देश मिलकर आतंकवाद, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य सुरक्षा खतरों का मुकाबला कर सकते हैं. रॉयल ब्रुनेई सशस्त्र बल और अमेरिकी सेना के बीच यह तालमेल आगे भी जारी रहेगा, जिससे दोनों देशों की सुरक्षा क्षमताएं और मजबूत होंगी.
  • यह अभ्यास 15 जून, 2024 को शुरू हुआ और 29 जून, 2024 को समाप्त हुआ. इस दौरान, लगभग 500 से ज़्यादा सैनिकों ने हिस्सा लिया. अभ्यास के दौरान, दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी मौजूद रहे और उन्होंने सैनिकों के प्रदर्शन को सराहा. उन्होंने कहा कि इस तरह के अभ्यास दोनों देशों के लिए बेहद फायदेमंद हैं और भविष्य में ऐसे और भी आयोजन किए जाएंगे.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

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