JN.1 वैरिएंट क्या है? नये वैरिएंट ने बढ़ाई टेंशन, केरल में कोराना से सत्रह दिनों में 10 मौत

केरल की एक 78 वर्षीय महिला भारत की पहली ऐसी संक्रमित हैं, जिसके Sars-CoV-2 के JN.1 वैरिएंट से संक्रमित होने की पुष्टि हुई. इसके बाद केंद्र की मोदी सरकार एक्टिव हो गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने एक अहम बैठक बुलाई है.

देश में कोरोना के नये वैरिएंट ने फिर टेंशन बढ़ा दी है. जी हां…देश में सोमवार को कोरोना संक्रमण के 260 नये मामले आने के बाद इलाज करा रहे मरीजों की संख्या बढ़कर कुल 1,828 हो गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर इस बाबत जानकारी दी गई. कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों में से अकेले 111 मामले केरल से मिले जिसके बाद इस राज्य की टेंशन बढ़ गई है. कोविड-19 से एक मरीज की मौत भी यहां हुई है. इस बीच आपको बता दें कि केरल की एक 78 वर्षीय महिला भारत की पहली ऐसी संक्रमित हैं, जिसके Sars-CoV-2 के JN.1 वैरिएंट से संक्रमित होने की पुष्टि हुई. यह वहीं वैरिएंट है जो अन्य देशों में कोरोना संक्रमण के बढ़ने की वजह बनी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से इसको लेकर अलर्ट जारी किया गया है और देशों से इसपर निगरानी रखने को कहा गया है.

कैसे इस वैरिएंट को संक्रमित ने मात दी?

केरल के इस संक्रमित में हल्के लक्षणों की सूचना मिली थी. वह अपने संक्रमण से उबर भी चुकी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस बात का पता लगाने में जुट गई है कि कैसे इस वैरिएंट को संक्रमित ने मात दी, जो अन्य देशों में परेशानी का सबब बन गया है. मंत्रालय ने सोमवार को राज्यों से निगरानी बढ़ाने के लिए कहा है. इस बीच खबर है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया कुछ राज्यों में कोविड-19 सहित सांस संबंधी बीमारी के मामलों में वृद्धि के मद्देनजर स्वास्थ्य सुविधाओं और सेवाओं की तैयारियों की 20 दिसंबर को समीक्षा करने वाले हैं.

केरल में कोराना से पंद्रह दिनों में 10 मौत

केरल में कोविड मामलों के साथ-साथ मौतों में भी वृद्धि देखी जा रही है. राज्य स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने कहा कि केंद्र को भेजे गए आंकड़ों में बताया गया है कि, राज्य में पाए जाने वाले दैनिक मामले एक सप्ताह में लगभग तीन गुना हो चुके हैं, जबकि 1 से 17 दिसंबर तक 10 मौतें हुई हैं.

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मोदी सरकार हुई एक्टिव

केंद्र की मोदी सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से सांस संबंधी बीमारी के मामलों में वृद्धि और देश में कोरोना वायरस के नए JN.1 वैरिएंट का पहला मामला आने के बीच निरंतर निगरानी बनाए रखने को कहा है. भारत का JN.1 वैरिएंट का पहला मामला आठ दिसंबर को केरल में सामने आया. इससे पहले, तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के एक यात्री को सिंगापुर में JN.1 वैरिएंट से संक्रमित पाया गया था. बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री कुछ राज्यों में हाल में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) और कोविड-19 सहित गंभीर सांस की बीमारी (एसएआरआई) के मामलों में वृद्धि के मद्देनजर स्वास्थ्य सुविधाओं और सेवाओं की तैयारियों की समीक्षा करने वाले हैं. ऑक्सीजन, अस्पताल के बिस्तर, वेंटिलेटर, दवाओं, डायग्नोस्टिक्स समेत अन्य इंतजाम और निगरानी के उपायों पर भी बात हो सकती है.

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JN.1 वैरिएंट क्या है?

JN.1 सब-वैरिएंट BA.2.86 (जिसे पिरोला के नाम से भी जाना जाता है) का एक नया सब-वैरिएंट है. अपने आप में यह तेजी से फैलने वाला ओमीक्रॉन वैरिएंट का एक ऑफ-शूट है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह अधिक प्रतिरक्षा प्रतिरोधी होता है. नवंबर में WHO वैज्ञानिकों द्वारा इसे वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (VOI) के रूप में पहचाना गया.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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