Rajouri Encounter: घर आने का वादा पूरा नहीं कर पाये शहीद अब्दुल माजिद, बोले चाचा- देश भक्ति हमारे खून में

Jammu and Kashmir's Rajouri Encounter : हवलदार माजिद के परिवार में उनकी पत्नी सगेरा बी. और तीन बच्चे हैं. माजिद की पत्नी ने कहा कि अभी एक दिन पहले उसने मुझे कॉल किया. शहीद माजिद ने पत्नी से जल्द घर वापस आने का वादा किया था.

Jammu and Kashmir’s Rajouri Encounter : जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में जो मुठभेड़ चल रही थी, उसकी समाप्ति की खबर आ रही है. मुठभेड़ में सेना के पांच जवान शहीद हो गए हैं. वहीं, सुरक्षा बलों ने दो आतंकियों को मार गिराया. मुठभेड़ को लेकर उत्तरी कमान कमांडर इन चीफ उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि हमारे जवानों ने जो कार्रवाई की है इसमें शहादत तो हुई है लेकिन हमने दो खूंखार आतंकवादियों को ढेर कर दिया है. ये वही आतंकी हैं जिन्होंने डांगरी, कांडी या रजौरी में निहत्थे नागरिकों की हत्या की थी इसलिए इन्हें खत्म करना जरूरी था. उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है कि इनकी ट्रेनिंग कई देशों में हुई हो, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी इन्होंने ट्रेनिंग ली हो, ऐसा हो सकता है. ये लोग काफी ट्रेन्ड थे इसलिए इन्हें खत्म करने में थोड़ा समय लगा. इस मुठभेड़ के बाद एक जवान की चर्चा लोग ज्यादा कर रहे हैं जिसका नाम अब्दुल माजिद है. वह आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गये है. माजिद एक पैरा कमांडो थे जिनका परिवार एलओसी पर जीरो-लाइन और सीमा बाड़ के बीच स्थित अजोट गांव में निवास करता है. जैसे ही जवान के शहीद होने की खबर गांव पहुंची वहां मातम पसर गया. परिजनों का जहां रो-रो कर बुरा हाल है. वहीं, उन्हें अपने लाल की शहादत पर गर्व भी है.

भाई भी हो चुका है देश के लिए शहीद

बात करें शहीद माजिद की तो उनके परिवार ने पहले भी देश के लिए शहादत दी है. न्यूज वेबसाइट एनडी टीवी ने उनके परिवार से बातचीत के आधार पर जो खबर दी है उसके अनुसार माजिद के भाई भी जम्मू कश्मीर लाइट इन्फेंट्री (जेकेएलआई) के सैनिक थे. वे साल 2017 में पुंछ के एक इलाके में शहीद हुए थे. माजिद के परिवार के लोगों ने कहा कि हम देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं. सेना की जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंट्री (जेकेएलआई) से सिपाही पद से माजिद के चाचा मोहम्मद यूसुफ रिटायर हैं. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारा परिवार देश की रक्षा करने के लिए हमेशा तत्पर रहता है. हम एलओसी पर रहने वाले सैनिक परिवार से हैं. हमारे परिवार के 30 से 40 ऐसे सदस्य हैं, जो भारतीय सेना में सेवारत हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं.

माजिद की पत्नी ने कहा कि अभी एक दिन पहले उसने मुझे कॉल किया. शहीद माजिद ने पत्नी से जल्द घर वापस आने का वादा किया था. उसने कहा था कि वह जल्द ही घर आएगा. पत्नी ने कहा कि मैंने उसे कई बार फोन किया लेकिन उसका मोबाइल बंद था. शाम को, सेना ने मुझे बताया कि मुठभेड़ में वह घायल हो गया है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है. इसके बाद जो खबर आई वो हमारे लिए बहुत बुरी थी. माजिद के शहीद होने की खबर से पूरा घर सदमे में है.

सुरंग की तस्वीर आई सामने

आतंकियों और जवानों के बीच करीब 36 घंटे मुठभेड़ चली. इस मुठभेड़ के बाद जब इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया तो हथियार बरामद हुआ. यही नहीं यहां एक सुरंगनुमा गड्ढा मिला है. बताया जा रहा है कि आतंकी इसी में छिपे थे. जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए पांच जवानों को सेना और पुलिस ने शुक्रवार को सुबह श्रद्धांजलि दी. सुरक्षा बलों के साथ 36 घंटे तक चली मुठभेड़ में अफगानिस्तान में प्रशिक्षित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के एक शीर्ष कमांडर सहित दो आतंकवादी ढेर कर दिये गये हैं.

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ये जवान हुए शहीद

आतंकियों से मुकाबला करते हुए अपनी जान न्योछावर करने वाले शहीदों में- कर्नाटक के मंगलोर के निवासी कैप्टन एम वी प्रांजल (63 राष्ट्रीय राइफल्स), उत्तर प्रदेश के आगरा के निवासी कैप्टन शुभम गुप्ता (9 पैरा), जम्मू-कश्मीर के पुंछ के निवासी हवलदार अब्दुल माजिद, उत्तराखंड के नैनीताल रहने वाले लांस नायक संजय बिष्ट और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के पैराट्रूपर सचिन लौर हैं. जैसे ही इनके शहीद होने की खबर घर तक पहुंची, इनके परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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