महाराष्ट्र के सतारा जिले के नंदगांव की रहने वाली मंगला अवाले को लोग प्यार से मंगला आजी कहते हैं. पति के जाने के बाद, चार बच्चों को पालना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी. घर की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई. लेकिन उन्होंने मुश्किल हालात के आगे हार नहीं मानी. मजदूरी करके उन्होंने अपने बच्चों को पाला-पोसा और उन्हें बड़ा किया.
उम्र बढ़ी तो भी नहीं छोड़ी आत्मनिर्भरता
समय बीतता गया और बच्चे बड़े हो गए. उम्र के इस पड़ाव पर मंगला आजी चाहतीं तो बच्चों पर निर्भर हो सकती थीं, लेकिन उन्होंने खुद अपने पैरों पर खड़े रहने का फैसला किया. उन्होंने ऑटो चलाने की ठानी और बेटे ने भी उनका पूरा साथ दिया.
15 दिन में सीखा ऑटो चलाना
मंगला आजी ने महज 15 दिनों में ऑटो चलाना सीख लिया. जब उन्होंने पहली बार ऑटो का स्टीयरिंग थामा तो उन्हें अपने कंधों पर एक नई सी ज़िम्मेदारी का एहसास हुआ, लेकिन साथ ही एक आत्मविश्वास भी जागा. यह एहसास था कि वह अब भी आत्मनिर्भर रह सकती हैं. इसके बाद उन्होंने कराड-उंडाले मार्ग पर ऑटो चलाना शुरू कर दिया. वह रोज सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती हैं.
रोज कमाती हैं 500 से 700 रुपये
ऑटो चलाकर मंगला आजी रोज करीब 500 से 700 रुपये तक कमा लेती हैं. साथी ड्राइवर भी उनकी मेहनत का सम्मान करते हैं. एक बार जब उन्होंने यह बात बताई तो उनके साथी ड्राइवरों ने कहा, "अरे, आजी को पहले जाने दो, उनका टाइम हो गया है."
उम्र नहीं, हौसला मायने रखता है
मंगला आजी की कहानी सिर्फ एक महिला के ऑटो चलाने की कहानी नहीं है. यह उस मां के संघर्ष की कहानी है, जिसने पति के जाने के बाद चार बच्चों को संभाला और अब 65 की उम्र में भी अपने दम पर जिंदगी जी रही है. हाल ही में, सोशल मीडिया पर एक यात्री ने उनके ऑटो में यात्रा करते हुए उनकी कहानी साझा की, जिसने लोगों को भावुक कर दिया और उन्हें हिम्मत भी दी. उन्होंने साबित कर दिया कि उम्र चाहे कितनी भी हो, अगर हौसला जिंदा है तो जिंदगी की स्टेयरिंग अपने हाथ में रखी जा सकती है.
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