India Pakistan War : 1965 की जंग में ऐसे आगे बढ़ रही थी भारतीय सेना, पाकिस्तान जोड़ने लगा था हाथ

India Pakistan War : पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव है. इस बीच साल 1965 की एक तस्वीर को एक्स हैंडल से शेयर किया गया है. जानें इस तस्वीर में क्या है खास?

India Pakistan War : भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जारी है. इस बीच साल 1965 की एक तस्वीर सामने आई है. इसे indianhistorypics @IndiaHistorypic नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है. तस्वीर के कैप्शन में लिखा गया है– लाहौर जाने वाली सड़क पर पाकिस्तान में इचोगिल नहर पर भारतीय सेना..भारत ने हाजी पीर दर्रे पर भी कब्ज़ा कर लिया था, लेकिन जब पाकिस्तानी सेना और अयूब खान ने ताशकंद में हाथ जोड़कर विनती की तो तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने सद्भावना के तौर पर हाजी पीर दर्रा लौटा दिया.

1965 की जंग में पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा था. सितंबर 1965 में भारत ने लाहौर पर कब्जे की स्थिति बना ली थी और पाकिस्तान शहर खोने के करीब था. लेकिन 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप के बाद भारत ने युद्धविराम किया. इसके बाद दोनों देशों के बीच ताशकंद समझौता हुआ, जिससे युद्ध समाप्त हुआ.

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भारत और पाकिस्तान में किसकी सेना मजबूत

अगर भारत और पाकिस्तान की सैन्य ताकत की तुलना करें, तो पाकिस्तान भारत से काफी पीछे है. 2025-26 में भारत का रक्षा बजट लगभग 79 बिलियन डॉलर है, जबकि पाकिस्तान का सिर्फ करीब 8 बिलियन डॉलर है. इसका मतलब है कि भारत सेना पर पाकिस्तान से लगभग दस गुना ज्यादा खर्च करता है. भारत के पास राफेल फाइटर जेट और एस-400 जैसी आधुनिक रक्षा प्रणाली है. हाल ही में भारत ने MIRV तकनीक वाली अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण भी किया, जो एक साथ कई ठिकानों पर हमला कर सकती है. फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास 180 परमाणु हथियार हैं जबकि पाकिस्तान के पास 170. पाकिस्तान की आर्थिक हालत कमजोर है, जिसकी वजह से वह अपनी सेना को ज्यादा आधुनिक नहीं बना पा रहा है.

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By Amitabh kumar

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अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

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