बुलेट ट्रेन : 3 सुरंगें, 8 स्टेशन और हाई स्पीड सफर... बदल जाएगी चेन्नई-बेंगलुरु की कनेक्टिविटी

भारत की तीसरी बुलेट ट्रेन परियोजना चेन्नई और बेंगलुरु को जोड़ेगी. यह परियोजना अब एक कदम आगे बढ़ गई है. केंद्र सरकार ने प्री-कंस्ट्रक्शन यानी शुरुआती तैयारियों के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं. करीब 306.2 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण नए रूट (अलाइनमेंट) के आधार पर किया जाएगा. इससे दोनों शहरों के बीच सफर तेज और आसान होने की उम्मीद है.

लेटेस्ट टेंडर पेपर के मुताबिक, परंदूर स्टेशन को लेकर अब स्थिति साफ नहीं है. पहले की योजना में इसे बुलेट ट्रेन के स्टॉप के रूप में शामिल किया गया था, लेकिन संशोधित रूट में इसे 'फ्यूचर स्टेशन' यानी भविष्य में बनने वाले स्टेशन के तौर पर दिखाया गया है. वहीं, बाकी सभी स्टेशनों को नियमित स्टॉप स्टेशन के रूप में रखा गया है. लेटेस्ट टेंडर पेपर के हवाले से अंग्रेजी वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस परियोजना को लेकर पूरी जानकारी प्रकाशित की है.

परियोजना के साल 2035 तक पूरी होने की उम्मीद

यह परियोजना साल 2035 तक पूरी होने की उम्मीद है. इसके बाद चेन्नई से बेंगलुरु का सफर करीब एक घंटे में पूरा किया जा सकेगा. बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 350 किमी प्रति घंटा होगी. अभी ट्रेन से यही दूरी तय करने में करीब सात घंटे लगते हैं, इसलिए इस परियोजना से यात्रा काफी तेज और सुविधाजनक हो जाएगी.

चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन और मेट्रो स्टेशन का रखा जाएगा ध्यान

बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का पहला स्टेशन चेन्नई सबअर्बन स्टेशन के पश्चिमी हिस्से में बनाया जाएगा. इसे 100 मीटर और 50 मीटर लंबे कनेक्टिंग रास्तों के जरिए चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन और मेट्रो स्टेशन से जोड़ा जाएगा. वहीं, पूनमल्ली स्टेशन को आउटर रिंग रोड और मेट्रो नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को आने-जाने में आसानी होगी.

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बेंगलुरु के बैयप्पनहल्ली स्टेशन पर बुलेट ट्रेन का होगा अंतिम पड़ाव

चेन्नई-बेंगलुरु बुलेट ट्रेन का ज्यादातर हिस्सा एलिवेटेड (ऊंचे पुल) पर बनेगा. यह लाइन चेन्नई के पेरंबूर, कोलाथुर, माधवरम, पाडी, अन्नानूर, पूनमल्ली और अरक्कोनम से होकर गुजरेगी. इसके बाद आंध्र प्रदेश के चित्तूर और कर्नाटक के कोलार, कोडिहल्ली, व्हाइटफील्ड होते हुए बेंगलुरु के बैयप्पनहल्ली स्टेशन पर इसका अंतिम पड़ाव होगा.

लगभग 28 किलोमीटर हिस्सा अंडरग्राउंड होगा

चेन्नई-बेंगलुरु बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कुल तीन सुरंगें (टनल) बनाई जाएंगी. एक सुरंग चेन्नई सेंट्रल के पास होगी, जबकि दो अन्य आंध्र प्रदेश के कौंडिन्य वन्यजीव अभयारण्य और बेंगलुरु में बनेंगी. करीब 306 किलोमीटर लंबे इस रूट में लगभग 28 किलोमीटर हिस्सा जमीन के नीचे यानी अंडरग्राउंड होगा.

जमीन अधिग्रहण का काम जारी

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए प्रस्तावित रूट पर पड़ने वाले 41 गांवों में जमीन अधिग्रहण का काम जारी है. साथ ही कांचीपुरम, अरक्कोनम और श्रीपेरंबदूर को जोड़ने वाले नए स्टेशन की कनेक्टिविटी पर भी काम हो रहा है.


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Published by: Amitabh Kumar

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